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मंटो के अफसाने

सुनिए मंटो का अफसाना : डार्लिंग

23 September 2022

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मैं जब उस की तरफ़ बढ़ा तो उस ने पलट कर मेरी तरफ़ देखा. बारिश के लरज़ते हुए पर्दे में से मुझे देख कर भागी. मगर मैंने चंद गज़ों ही में उसे जा पकड़ा. जब हाथ इस के चिकने ज़ीन कोट पर पड़ा तो वो अंग्रेज़ी में चिल्लाई...हेल्प...हेल्प... 

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सभी 53 एपिसोड

फ़र्ख़ंदा बहुत ख़ुश हुई। देर तक दोनों घुल मिल के बातें करती रहीं। नसीमा अब उसे और ज़्यादा ख़ूबसूरत दिखाई दी। उसकी हर अदा जो मर्दाना तर्ज़ की थी इसे बेहद पसंद आई और वहीं फ़ैसला हो गया कि वो ता-दम-ए-आख़िर सहेलियां बनी रहेंगी...

सुरेंद्र ने उन अधेड़ उम्र की नौकरानियों से अपनी तरफ़ से कोई कोशिश नहीं की थी। वो ख़ुद उसको खींच कर अपनी कोठरियों में ले जाती थीं। मगर सुरेंद्र अब महसूस करता था कि ये सिलसिला उस को अब ख़ुद करना पड़ेगा, हालाँकि उसकी तकनीक से क़तअ’न नावाक़िफ़ था...
 

ये आंखें बिल्कुल ऐसी ही थीं जैसे अंधेरी रात में मोटर कार की हेडलाइट्स जिनको आदमी सब से पहले देखता है। आप ये न समझिएगा कि वो बहुत ख़ूबसूरत आंखें थीं, हरगिज़ नहीं। मैं ख़ूबसूरती और बदसूरती में तमीज़ कर सकता हूँ। लेकिन माफ़ कीजिएगा, इन आंखों के मुआमले में सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूं कि वो ख़ूबसूरत नहीं थीं। लेकिन इसके बावजूद उनमें बेपनाह कशिश थी... 

बरसात

1 December 202215 mins 41 secs

मंटो का अफसाना : बू

बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंगदार पलंग पर जो अब खिड़की के पास से थोड़ा इधर सरका दिया गया था एक घाटन लौंडिया रणधीर के साथ चिपटी हुई थी...

ईशर सिंह जूही होटल के कमरे में दाख़िल हुआ, कुलवंत कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज़ तेज़ आंखों से उसकी तरफ़ घूर के देखा और दरवाज़े की चटखनी बंद कर दी। रात के बारह बज चुके थे, शहर का मुज़ाफ़ात एक अजीब पुर-असरार ख़ामोशी में ग़र्क़ था...

इस कहानी में कलाकारों के दर्द को बयान किया गया है। महमूद और जमीला अपनी कला को एक मुकाम देने के लिए जतन करते हैं लेकिन हालात से परेशान हो कर आर्थिक निश्चिंतता के लिए वे एक फैक्ट्री में काम करने लगते हैं, लेकिन दोनों को यह काम कलाकार के प्रतिष्ठा के अनुकूल महसूस नहीं होता इसीलिए दोनों एक दूसरे से अपनी इस मजबूरी और काम को छुपाते हैं।

बारिश एक नौजवान के अधूरे इश्क़ की कहानी है। तनवीर अपनी कोठी से बारिश में नहाती हुईं दो लड़कियों को देखता है। उनमें से एक लड़की पर फिदा हो जाता है। एक दिन वो लड़की उससे कार में लिफ़्ट मांगती है और तनवीर को ऐसा महसूस होता है कि उसे अपनी मंज़िल मिल गई है लेकिन बहुत जल्द उसे मालूम हो जाता है कि वो वेश्या है...

ये कहानी है समलैंगिकता के उत्थान व पतन की। इसमें मंटो ने यह बताने की कोशिश की है कि बाज़ार में जिस चीज़ की मांग होती है उसकी अचानक अधिकता हो जाती है और जैसे ही उसकी मांग कम या ख़त्म होती है वो चीज़ भी ग़ायब हो जाती है...
 

मर्द के दोहरे रवैय्ये और औरत की मासूमियत को इस कहानी में बयान किया गया है। सलमा एक अविवाहित लड़की है और शाहिदा उसकी शादी-शुदा सहेली। 

ये एक ऐसी महिला की कहानी है जो बीमार होती है और एक लेखक को हमेशा ख़त लिखा करती है. एक दिन लेखक के घर पहुंच जाती है और कुछ ऐसा होता है जो लेखक में सोचने पर मजबूर कर देता है...
 

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