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परमवीर: मौत को हरा कर वापस लौटे मेजर थापा

13 August 2022

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20 अक्टूबर 1962. चीनी सैनिकों ने चुशुल एयरफ़ील्ड पर कब्ज़े के इरादे से लद्दाख की एक पोस्ट पर तोप और मोर्टार से बम दागने शुरू कर दिए. चीन की इस घुसपैठ का सामना करने के लिए पैंगॉन्ग झील के उत्तरी तट पर मौजूद श्रीजप-1 पोस्ट पर गोरखा राइफल्स के कुछ जवान मौजूद थे

परमवीर: मौत को हरा कर वापस लौटे मेजर थापा

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आजादी के बाद जब पाकिस्तान ने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देना शुरू किया, तो भारतीय सैनिकों ने उसका न केवल डटकर मुकाबला किया, बल्कि उसे शिकस्त का एक ऐसा जख्म दिया, जो आज तक नहीं भर पाया है...

कौन थे वो कबाइली जिन्होंने स्वतंत्र भारत पर पहला हमला किया, और कैसे मिला हमें हमारा पहला परमवीर... इस खास श्रृंखला में हम जानेंगे कहानी उन शहीदों की जो कहलाए परमवीर...

फिल्लौर की लड़ाई में लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुरज़ोरजी तारापोर ने पाकिस्तान के 60 टैंकों को ध्वस्त कर देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था

भारत के सैनिकों ने न सिर्फ मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों में भी शांतिबहाली में अहम भूमिका निभाई है। विदेश की धरती पर शांति स्थापित करने के लिए कुर्बान होने वाले एक सैनिकों में मेजर रामास्वामी परमेश्वरन भी शामिल हैं।

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना किसी भी कीमत पर सेक्टर द्रास की टाइगर हिल पर अपना कब्ज़ा चाहती थी. इसी के तहत 4 जुलाई ,1999 को 18 ग्रेनेडियर्स के एक प्लाटून को टाइगर हिल के बेहद अहम तीन दुश्मन बंकरों पर कब्ज़ा करने का दायित्व सौंपा गया था

पॉइंट 4875 और फ्लैट टॉप, इन दोनों चौकियों को शत्रु से मुक्त कराने का 17 जाट रेजीमेंट का एक प्रयास असफल रहा था, अब भारतीय सेना के सामने बड़ी चुनौती थी। तब जैक राइफल को इन दोनों चौकियों को जीतने का दायित्व सौंपा गया।

पाकिस्तान ने धोखे से जब 1999 कारगिल के कई चोटियों पर कब्जा कर लिया था, भारतीय सेना ने उन चोटियों को कब्जा मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया, इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

"अगर कोई आदमी कहता है कि वह मरने से नहीं डरता है, तो वह झूठ बोल रहा है. या फिर वह गोरखा है"...फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के इन शब्दों को कारगिल युद्ध के दौरान शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडे ने चरित्रार्थ किया
 

जम्मू-कश्मीर के काद्याल गांव की एक पहचान यह भी है कि वहां 6 जनवरी 1949 को बाना सिंह का जन्म हुआ था. आम बच्चों की तरह छोटी उम्र से ही उनकी नन्हीं आंखों में कुछ सपने थे. भारतीय सैनिक बनना इन्हीं में से एक था

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बसंतर की लड़ाई का बड़ा योगदान है। बसंतर की लड़ाई में एक टुकड़ी का नेतृत्व मेजर होशियार सिंह कर रहे थे। 1971 के युद्ध के लिए चार जांबाज सैनिकों को परमवीर चक्र से पुरस्कृत किया गया।

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