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Sun Cinema : जब अपने ही भाई विजय आनंद की फिल्म से बाहर कर दिए गए देव आनंद
सुन सिनेमा

Sun Cinema : जब अपने ही भाई विजय आनंद की फिल्म से बाहर कर दिए गए देव आनंद

29 September 2022

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3:52
नासिर हुसैन ने विजय आनंद से तीसरी मंजिल को निर्देशित करने का अनुरोध किया और बहारों के सपने की पेशकश की, लेकिन ये साफ कर दिया कि तीसरी मंजिल में अब देव आनंद नहीं होंगे...

Sun Cinema : जब अपने ही भाई विजय आनंद की फिल्म से बाहर कर दिए गए देव आनंद

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अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के अलावा चरित्र अभिनेताओं ने भी सिने जगत में खूब पहचान बनाई है। ऐसे ही एक कलाकार थे ओम प्रकाश। एक दौर वो भी था जब हर दूसरी फिल्म में ओम प्रकाश नज़र आते थे। उन्होंने कई हिट फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए। कभी बेहद संजीदा रोल किए तो कभी दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट कर दिया। वैसे उनको फिल्मों में काम उनके मसखरेपन की वजह से मिला था।

आपने उनके बारे में काफी सुना होगा लेकिन आज मैं आपको उनकी अधूरी प्रेम कहानी और राह चलते शादी हो जाने का वाकया बताउंगा। ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर, 1919 को विभाजन से पहले भारत के लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका पूरा नाम ओम प्रकाश छिब्बर था। ओम प्रकाश के पिता एक अमीर किसान हुआ करते थे।उनके पास काफी जमीन थी जिसकी देखरेख वो खुद किया करते थे। लाहौर और जम्मू जैसे क्षेत्र में उस दौर में उनके कई बड़े बंगले भी थे, लेकिन ओम को दौलत का मोह कभी नहीं रहा। उनका मन हमेशा से अभिनय के लिए धड़कता था। 

दोस्तों आज बात होगी अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी की...बलराज साहनी सिर्फ एक्टर ही नहीं थे बल्कि बेहद जहीन इंसान भी थे...भाषाओं और शब्दों पर उनकी पकड़ कमाल थी...उन्होंने एक आम इंसान के दर्द और परेशानी को कई दफा फिल्मी पर्दे पर जुबान दी। वो दुनिया के किसी भी किरदार को पर्दे पर उतारने का माद्दा रखते थे। बलराज ने सीमा, काबुलीवाला, हकीकत, दो बीघा जमीन में अदाकारी से साबित कर दिया था कि वो आम इंसान के नायक और हिमायती हैं... उन पर फिल्माया गया गाना ऐ मेरी जोहरा जबीं आज भी गुनगुनाया जाता है...

आज हम बात करेंगे एक ऐसी फिल्म के बारे में जो शुरुआत में तो दर्शकों को बिल्कुल नहीं भायी लेकिन जब चली तो ऐसी चली की छप्पर फाड़ कमाई के साथ-साथ कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए...जी हां...हम बात कर रहे हैं 1978 में रिलीज हुई फिल्म डॉन की...डॉन में अमिताभ बच्चन, जीनत अमान और प्राण मुख्य भूमिकाओं में थे...आज डॉन हिंदी सिनेमा की क्लासिक और कल्ट फिल्मों में भले ही शुमार हो लेकिन इसे एक प्रोड्यूसर की मदद के लिए बनाया गया था। चलिए शुरुआत करते हैं कि कैसे ये फिल्म वजूद में आई...

फिल्मों में आपने ये डायलॉग तो जरूर सुना होगा...भागने की कोशिश मत करना...हमने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है...भलाई इसी में है कि तुम अपने आप को कानून के हवाले कर दो...कुछ याद आया...जी हां..हिंदी फिल्मों में लगभग हर पुलिसवाले की जुबान से ये सुनने को मिल ही जाता था...इस डायलॉग को सुनकर एक जो तस्वीर सामने उभरकर आती है वो हैं इफ्तिखार...सिने प्रेमी अभिनेता इफ्तिखार को पुराने जमाने की फिल्मों में पुलिसवाले की अनगिनत भूमिकाओं के लिए बखूबी जानते हैं...लेकिन क्या आप जानते हैं कि इफ्तिखार एक अच्छे कलाकार के साथ-साथ अच्छे गायक और पेंटर भी थे...हम आज इन्हीं की जिंदगी के बारे में बात करेंगे कि कैसे वो एक अच्छी खासी नौकरी छोड़कर मनोरंजन की दुनिया में आगे बढ़े...

दोस्तों आज हम जिनकी बात करने जा रहे हैं वो कपूर खानदान से ताल्लुक रखते हैं और अपने जमाने के मशहूर ओ मारूफ कलाकार रहे हैं...आज बात होगी शशि कपूर साहब की जिंदगी से जुड़े कुछ किस्सों की...शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में हुआ था...पिता पृथ्वीराज कपूर थियेटर के मालिक थे तो अदाकारी विरासत में मिली थी...जब फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो थियेटर में ताले पड़ने लगे..जिसकी वजह से शशि कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर को बंबई का रुख करना पड़ा...पिता और भाई मूक फिल्मों के जमाने से काम करने लगे...शशि कपूर थोड़े बड़े हुए तो उन्होंने भी बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया...और शुरू हो गया फिल्मों में अदाकारी का सफर...

दोस्तों आज बात होगी 1997 में आई एक्शन ड्रामा फिल्म विरासत की जिसे निर्देशित किया था प्रियदर्शन ने और मुख्य भूमिकाओं में थे अनिल कपूर, तब्बू, अमरीश पुरी, पूजा बत्रा, मिलिंद गुनाजी और गोविंद नामदेव हैं। फिल्म की कहानी मशहूर अभिनेता कमल हासन ने लिखी गई थी और तमिल फिल्म थेवर मगन की सफलता के बाद इसे हिंदी में विरासत के नाम से दोबारा बनाया गया। मुशीर-रियाज की जोड़ी ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था और संगीत अनु मलिक और एस पी वेंकटेश ने तैयार किया गया था....फिल्म विरासत से हिंदी सिनेमा में निर्देशक प्रियदर्शन ने वापसी की थी...इस फिल्म को तब्बू की बेहतरीन अदाकारी के लिए भी जाना जाता है...तो चलिए सुनाते हैं फिल्म विरासत से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें....
 

आज हम बात करेंगे फिल्म गाइड की...गाइड हिंदी फिल्मों की मास्टरपीस तो मानी ही जाती है साथ ही इसके अंग्रेजी संस्करण ने कान्स में भी जलवा बिखेरा वो भी अपनी रिलीज के 42 साल बाद 2007 में... हालांकि इसका अंग्रेजी संस्करण अपने रिलीज के वक्त फ्लॉप रहा था जबकि डायरेक्टर टैड डेनियलवस्की ने इस फिल्म में वहीदा रहमान का एक न्यूड सीन भी रखा था जिसे बॉडी डबल पर फिल्माया गया था...देव आनंद और वहीदा रहमान की जोड़ी से सजी इस फिल्म ने गीत-संगीत, डायलॉग, एक्टिंग हर तरह से इतिहास रच दिया....

दोस्तों आज बात होगी उस अभिनेत्री की जिसके दीवाने अमेरिकी सैनिक भी थी...अपनी जेब में फोटो लेकर जंग लड़ते थे...वो न तो वो मधुबाला हैं और न ही नरगिस...और न ही सुरैया...इस अभिनेत्री का नाम है बेगम पारा...जी हां...आज की पीढ़ी ने शायद बेगम पारा का नाम ना सुना हो लेकिन एक्ट्रेस बेगम पारा ने 40 से 50 के दशक में बोल्ड फोटोशूट करवाकर हिंदी सिनेमा में भूचाल ला दिया था। हर तरफ बेगम पारा के चर्चे थे। बेगम पारा दिलीप कुमार की भाभी और अभिनेता अय्यूब खान की मां थीं...

फिल्म में खलनायक की भूमिका के लिए विजय आनंद ऐसे कलाकार को चाहते थे जिसे दर्शकों ने कभी नकारात्मक किरदार में न देखा हो..क्योंकि कहानी की मांग भी वही थी. इसलिए विजय आनंद ने अशोक कुमार को इस किरदार के लिए चुना....

दोस्तों आज बात होगी उनकी,जिन्हें हिंदी फिल्मों का पहला सुपरस्टार कहा जाता है...जी हां हम बात कर रहे हैं अशोक कुमार की...क्या आप जानते हैं कि अशोक कुमार को कैसे किस्मत ने अभिनेता बता दिया था...वक्त जाया न करते हुए करते हैं कहानी की शुरुआत...अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था....40 और 50 के दशक में हीरो बनकर, फिर चरित्र किरदार कर अशोक कुमार ने दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया...अशोक कुमार एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पेंटर थे...साथ ही वो होम्योपैथी की प्रैक्टिस भी किया करते थे...उनका अभिनेता बनने का कोई इरादा नहीं था और बॉम्बे टॉकीज में लैब असिस्टेंट की नौकरी कर रहे थे...वो कहते हैं न कि अगले पल आपकी जिंदगी में क्या होने वाला है वो किसी को नहीं पता होता है...उनके फिल्मों में आने की कहानी शुरू हुई 1935 में आई फिल्म जवानी की हवा से...

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