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Punjab: धान में बौनेपन के वायरस से पठानकोट में सबसे अधिक फसल प्रभावित, किसान मांग रहे मुआवजा

संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट। Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Fri, 09 Sep 2022 10:39 PM IST
सार

कृषि विशेषज्ञ डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि पठानकोट में कुल 28,500 हजार एकड़ में धान की पैदावार की जाती है। इसमें से 2 हजार एकड़ में बासमती और बाकी में लंबे समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों की पैदावार हो रही है।

बरबाद हुई धान की फसल
बरबाद हुई धान की फसल - फोटो : ANI
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विस्तार

पंजाब में पहली बार पाए गए एसआरबीएसएसवी (सदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीट स्टंट वायरस) से पठानकोट में धान की फसल को सबसे अधिक प्रभावित किया है। इस समस्या को आम भाषा में ‘धान का बौनापन’ भी कहा जाता है। अन्य जिलों के मुकाबले पठानकोट में सबसे अधिक फसल को नुकसान पहुंचने से त्रस्त किसान अपने हाथों से बोई फसल को नष्ट कर रहे हैं।


पठानकोट में 4500 हेक्टेयर (लगभग 11126 एकड़) रकबे में फसल इस वायरस की चपेट में आई है। कृषि विभाग के मुताबिक पंजाब के किसी जिले में उक्त वायरस ने इतना कहर नहीं बरपाया है। हालांकि, पठानकोट के बाद मोहाली में भी इस वायरस से काफी फसल को नुकसान हुआ है। शुक्रवार को हलका भोआ में किसानों ने हजारों एकड़ फसल ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दी। किसानों ने वायरस से बर्बाद हुई फसल को लेकर मुआवजे की मांग की है। वहीं, जिला कृषि विभाग ने इसकी रिपोर्ट बनाकर डीसी और कृषि विभाग के डायरेक्टर को सौंप दी है।

धान की पीआर-121 फसल अधिक प्रभावित

कृषि विशेषज्ञ डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि पठानकोट में कुल 28,500 हजार एकड़ में धान की पैदावार की जाती है। इसमें से 2 हजार एकड़ में बासमती और बाकी में लंबे समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों की पैदावार हो रही है। उन्होंने बताया कि इनमें से धान की पीआर-121 पर इसका सबसे अधिक असर देखने को मिला है। इसके अलावा, पीआर-127, 128, 130, 131 भी इसकी चपेट में हैं। डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि अधिकतर खेतों में 90 फीसदी तक फसल इस वायरस की चपेट में आई है।

विशेष कीट के जरिये फैलता है वायरस : कृषि विशेषज्ञ

डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि यह वायरस एक से दूसरे पौधों में फैलता है, जिसकी वजह ‘व्हाइट बैक्स प्लांट हॉपर’ नामक कीट है। जोकि, एक से दूसरे पौधे पर पहुंचे उसे भी संक्रमित करता है। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञानियों और पीएयू ने पौधों को इस वायरस से बचाने के लिए कुछ दवाओं की सिफारिश की थी। लेकिन, देखा गया है कि अगर किसी खेत में 10-15 फीसदी से अधिक फसल इसकी चपेट में आई है तो उक्त दवाओं का असर नहीं हुआ। ऐसे में किसानों के पास विकल्प की कमी है। उन्होंने बताया कि पठानकोट में प्रभावित हुई फसल की रिपोर्ट बनाकर कृषि डायरेक्टर और डीसी पठानकोट को सौंप दी है।

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