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अमृतसर : एसजीपीसी के चुनाव इस वर्ष होने की उम्मीद, 11 वर्ष बाद चुनावों के लिए कमिश्नर ने सिख संगठनों से मुलाकात की

Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2022 01:15 AM IST
SGPC elections expected this year
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अमृतसर। पंजाब में संगरूर लोकसभा चुनाव सफलता से संपन्न होने के बाद अब एसजीपीसी के चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। 11 साल से एसजीपीसी चुनाव नहीं हुए हैं और ऐसे में सिख संगठनों की आवाज उठती देखकर गुरुद्वारा चुनाव के चीफ कमिश्नर ने अपना कामकाज तेज कर दिया है। उन्होंने जहां विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा से मुलाकात की वहीं कई सिख संगठनों से भी इस बात पर चर्चा की है। मिली जानकारी के मुताबिक चीफ कमिश्नर पद से रिटायर जस्टिस एस एस सरां से सुखदेव सिंह ढींडसा के अलावा परमिंदर सिंह ढींडसा और कई आप विधायकों ने मुलाकात की है।

वहीं स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी को पत्र लिखकर गुरुद्वारा चुनाव के चीफ कमिश्नर को तमाम सहूलियतें मुहैया करवाने के लिए कहा है। सेक्टर 17 स्थित कार्यालय में भी पूरा स्टाफ मुहैया करवाया जा रहा है। शिरोमणि कमेटी के महासचिव करनैल सिंह पंजौली ने कई आपत्तियां भी चीफ कमिश्नर तक पहुंचाई हैं।

बादल दल के विरोधियों को आशा है कि पंथक राजनीति में बैकफुट पर पहुंच चुके अकाली दल बादल को अब एसजीपीसी के प्रबंधों से बाहर किया जाना मौजूदा राजनीतिक हालातों में आसान है। एसजीपीसी के हाउस के चुनाव वर्ष 2016 से लंबित हैं। अंतिम बार एसजीपीसी के चुनाव वर्ष 2011 में हुए थे। सिख गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार हर पांच वर्ष बाद एसजीपीसी के चुनाव करवाए जाने अनिवार्य हैं।
इससे पहले भी एसजीपीसी के चुनाव कभी समय पर नहीं हुए। हमेशा ही पांच वर्ष पूरे होने के बाद जब भी चुनाव का समय आता है तो कोई न कोई याचिका अदालत में चली जाती है, जिससे चुनाव समय पर नहीं हो पाते। इस वक्त भी एसजीपीसी के चुनावों के रास्ते में अदालत में लंबित पड़े सहजधारी सिखों को वोट का अधिकार देने के मामले पर हुए फैसले को रिव्यू करने, अलग हरियाणा सिंह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और एसजीपीसी का कार्यकाल वर्ष 2011 या 2016 से माना जाए यह विवाद विचाराधीन है।
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार व पंथक अकाली लहर के मुखी जत्थेदार रणजीत सिंह कहते हैं कि अकाली दल बादल की ओर से पंथक रिवायतों की धज्जियां उड़ा दी हैं। तख्त साहिबों के जत्थेदारों और एसजीपीसी का उपयोग अपनी राजनीतिक कुर्सियों को बचाने के लिए उपयोग किया है, जोकि गलत है। बादल दल हमेशा ही एसजीपीसी के चुनाव न करवाने के पक्ष में रहा है। नियमों के अनुसार एसजीपीसी के चुनाव अब होने चाहिए।
सिख सद्भावना दल के नेता व श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि गुरुद्वारा के प्रबंध इस समय सही नहीं चल रहे हैं। एसजीपीसी समेत अलग-अलग धार्मिक प्रतिनिधि संस्थाओं पर अकाली दल बादल का कब्जा है। अब एसजीपीसी का नेतृत्व भी बदला जाना चाहिए और लंबित पड़े एसजीपीसी के चुनाव करवाने चाहिए।
सहजधारी सिख पार्टी के अध्यक्ष डॉ. परमजीत सिंह राणू ने कहा कि एसजीपीसी पर काबिज मौजूदा नेतृत्व की पंथ विरोधी राजनीतिक साजिशों के कारण आज सहजधारी सिखों से एसजीपीसी के चुनावों में हिस्सा लेने का अधिकार छीन लिया है। इसे हम चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2016 से लंबित एसजीपीसी के चुनावों को करवाना चाहिए और सहजधारी सिखों को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए जो अधिकार उनको वर्ष 1949 से हासिल है।
शिअद अमृतसर के कार्यालय सचिव एचएस संधू ने कहा कि अब पंजाब के लोग बदलाव के लिए तैयार हो चुके हैं। पहले पंथ ने बादल दल को राजनीति से बाहर किया और अब धार्मिक प्रबंधों से भी बाहर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी शुरू से ही मांग करती आ रही है कि एसजीपीसी के लंबित पड़े चुनाव करवाए जाएं। इसके लिए उनकी पार्टी के नव निर्वाचित सांसद सिमरनजीत सिंह मान की ओर से संसद में भी आवाज उठाई जाएगी और इसके लिए पार्टी का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री से भी मिलेगा।

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