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अकाली नेता व उसके भाई समेत तीन लोगों पर सरकार को महंगे दाम पर जमीन बेचने का मामला दर्ज

Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Tue, 28 Jun 2022 10:57 PM IST
A case has been registered against three people including Akali leader and his brother for selling land at expensive price to the government
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रोपड़। रोपड़ से आप विधायक दिनेश की ओर से विधानसभा में सवाल उठाए जाने के बाद अकाली नेता व हिमाचल के एसजीपीसी सदस्य समेत तीन लोगों पर महंगे दाम पर सरकार को जमीन बेचने के आरोप में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जिले के थाना नूरपुरबेदी में दर्ज मामले में हिमाचल के एसजीपीसी सदस्य दलजीत सिंह भिंडर उनके भाई अमरिंदर सिंह भिंडर और कमल किशोर को इस मामले में पुलिस ने नामजद किया है। वन व जीव सुरक्षा विभाग के मुख्य सचिव की शिकायत पर दर्ज हुए मामले में गांव करूरा व नानगरां कलमोट में स्थित 54 एकड़ 8 मरले जमीन विभाग को महंगे दाम पर बेचने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस सरकार में 90 हजार रुपये प्रति एकड़ क्लेक्टर रेट वाली जमीन 9.90 लाख रुपये प्रति एकड़ में विभाग ने खरीदी है। इस मामले की गाज विभाग के कई अधिकारियों और कुछ अन्य नेताओं पर भी गिरने की आशंका जताई जा रही है।

गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार के समय खरीदी गई इस जमीन का मामला पहले भी गरमाया था और उस दौरान मंत्री रहे साधू सिंह धर्मसोत पर भी आरोप लगे थे। जिसके बाद हुई जांच के बाद मामला दब गया था, लेकिन अब विधायक दिनेश चड्डा ने इस मामले में विधानसभा में सोमवार को सवाल नंबर 264 लगाया और सवाल लगाने के अगले ही दिन मंगलवार को पुलिस ने कार्रवाई कर दी। मामले में कहा गया है कि गांव करूरा में 9 लाख 90 हजार रुपये प्रति एकड़ के दाम पर पंजाब सरकार को जमीन बेची गई है, जबकि इसका क्लेक्टर रेट केवल 90 हजार रुपये प्रति एकड़ है।

जबकि वन विभाग की ओर से इस जमीन का क्लेक्टर रेट और मार्केट रेट जानने के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन माल विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया। यही कारण है कि वन और माल विभाग के कुछ अधिकारी भी इस जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस जमीन का दाम नजदीकी गांव कट्टा में 2020 में 10 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बिकी जमीन के आधार पर तय किया गया था। जबकि बाद में हुई जांच में पाया गया कि यह जमीन गांव कट्टा के बजाय गांव कलमां की निकली और इसकी कीमत भी 50 हजार रुपये प्रति एकड़ बताई गई है। इसलिए करोड़ों का घोटाला होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं इस मामले में वन विभाग ने खुद की गर्दन बचाने के लिए एक मामला श्री आनंदपुर साहिब की अदालत में दायर किया हुआ है, जिसमें जमीन मालिकों से पैसे रिकवर करने की अपील की गई है।
वहीं इस संबंध में दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि जमीन खरीद में बड़े स्तर पर हेरफेर कर सरकार को बडे़ स्तर पर चपत लगाने की आशंका जताई गई है। उधर, सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दी हुई भी धोखाधड़ी की शिकायत को भी इस मामले में शामिल कर लिया गया है। उधर, विधायक दिनेश चड्डा ने इस संबंध में कहा कि पिछली सरकार के दौरान जिले में दफा 4 और 5 के तहत रिजर्व जमीन को ‘गैर राखवीं’ दिखाकर घोटाला किया गया है। उन्होंने बताया कि वन मंत्री इस संबंध में चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे हैं। वन विभाग ने जमीन बेचने वाले लोगों से राशि की वसूली करने के लिए सिविल जज आनंदपुर साहिब में केस भी दायर किया है।

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