जब तक केंद्र वापस नहीं लेता कृषि के नए तीन कानून, जारी रहेगा किसानों का जुनून आंदोलन

Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 20 Sep 2021 02:05 AM IST
Till the center does not withdraw the new three laws of agriculture, the farmers' passion movement will continue
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मोहाली। केंद्र सरकार जब तक पारित किए गए कृषि के नए तीन कानूनों को वापस लेकर रद्द नहीं करती तब तक किसान अपने आंदोलन को वापस नहीं लेंगे और इसे जारी रखेंगे। ये विचार रविवार को फेज-8 स्थित लेट्स एजुकेटेड पंजाब की ओर से आयोजित महापंचायत के दौरान संयुक्त किसान मोर्चे के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने अपने संबोधन में कहे। दूसरी ओर, शहर में महापंचायत का आयोजन सोनिया मान की देखरेख में आयोजित किया गया। इसमें भारी संख्या में किसान शामिल हुए। रविवार को आयोजित महापंचायत में रूलदू सिंह मानसा, ऑल इंडिया किसान महासभा के उपप्रधान प्रेम सिंह गहलावत, भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान हरमीत सिंह कादियां, सिद्धूपुर किसान यूनियन के प्रधान जगजीत सिंह डलोवाल, भारतीय किसान यूनियन के बलबीर सिंह राजेवाल, बलदेव सिंह सिरसा, कंवलजीत सिंह के अलावा जिला किसान रोड संघर्ष कमेटी को-ओर्डिनेटर गुरदयाल सिंह बुट्टर भी मौजूद थे, जिन्होंने बारी-बारी किसानों को संबोधित किया।
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जानकारी के मुताबिक, फेज-8 स्थित रैली ग्राउंड का पूरा पंडाल किसानों से भरा था और मंच पर संयुक्त किसान मोर्चे के सदस्यों के अलावा अन्य शख्सियतें मौजूद थी और मंच पर एक के बाद एक नेताओं की तरफ से अपने-अपने स्तर पर उदाहरण देकर कृषि कानूनों को लेकर फायदे और नुकसान बताए गए। किसान नेताओं ने अपने संबोधन में बताया कि मोदी सरकार द्वारा बनाए तीन कानूनों को लागू करने का मतलब हमारी फसल अब कॉर्पोरेट घरानों के हाथ में आ जाएगी और वे बिना किसी रोकटोक के किसानों से कम दामों पर खरीदी गई फसल को मार्केट के अंदर महंगे दाम पर बेचेंगे और धीरे-धीरे कार्पोरेट घराने फसलों का निजीकरण करके किसानों से उसकी जमीन को अपने कब्जे में लेकर बेरोजगार बनाने का काम करेंगे।

किसान आंदोलन की आड़ में सियासी पार्टियां सेक रहीं रोटियां
संयुक्त किसान मोचे के सदस्य एवं भारतीय किसान यूनियन प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पंजाब के अंदर विधानसभा चुनाव हैं और हरेक पार्टी सत्ता पर काबिज होने के लिए हर तरह से किसानों को लुभाने में लगी हुई हैं और राजनीतिक रोटियां सेक रही हैं। जबकि नेताओं की सियासी चालों का किसान आंदोलन पर कोई असर नहीं।
पर्स चोरी की मिली सूचनाएं :
सुबह 10 बजे शुरू हुई किसान महापंचायत को लेकर पुलिस विभाग की तरफ से पुख्ता प्रबंध किए गए और रास्तों के ऊपर पुलिस अधिकारियों की तैनाती से महापंचायत में किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। लेकिन महापंचायत के दौरान शामिल होने वाले लोगों की कुछ पर्स चोरी होने आदि की घटनाएं जरूर सामने आई। दूसरी ओर, चोरी की घटनाओं की सूचनाएं मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।

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