नई रणनीति: अमरिंदर सिंह के मोती महल के बाहर से धरने हटे, अब कर्मचारियों ने सिद्धू का आवास घेरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 19 Sep 2021 09:03 PM IST

सार

पंजाब में कांग्रेस का नेता बदलते ही प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी रणनीति भी बदल दी है। इस्तीफा देने से पहले अमरिंदर सिंह के आवास के बाहर कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करते थे लेकिन सोमवार को पटियाला में नजारा बदला-बदला देखने को मिला। कर्मचारियों ने अमरिंदर सिंह के मोती महल के बाहर से धरने हटा लिया और नवजोत सिंह सिद्धू के आवास तक रोष प्रदर्शन किया। 
नवजोत सिंह सिद्धू के आवास के बाहर धरने पर बैठी महिला कर्मचारी।
नवजोत सिंह सिद्धू के आवास के बाहर धरने पर बैठी महिला कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रविवार शाम को चरनजीत सिंह चन्नी बाजी मार ली लेकिन पटियाला में प्रदर्शनकारियों ने अब मोती महल को छोड़कर पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की कोठी का रुख करना शुरू कर दिया है। रविवार को मोर्चे के तीसरे दिन पंजाब के कच्चे मुलाजिमों और भत्ता प्राप्त कर्मियों ने सिद्धू के आवास तक रोष मार्च निकाला और धरना लगाकर जमकर नारेबाजी की।
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24 सितंबर को सिद्धू के साथ बैठक का प्रस्ताव मिलने पर धरना समाप्त किया। उधर, बाकी संगठन भी अब मोती महल को छोड़कर सिद्धू की कोठी को घेरने की योजना बना रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री होने के कारण पटियाला धरनों का गढ़ बना था। आए दिन विभिन्न संगठन कैप्टन के मोती महल का घेराव और धरना प्रदर्शन करते थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार वाईपीएस चौक पर टकराव भी चुका है। 


कैप्टन के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने पटियाला में सिद्धू की कोठी का रुख करना शुरू कर दिया है। भले ही सीएम पद की दौड़ में जीत का सेहरा चरणजीत सिंह चन्नी के सिर सजा है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सिद्धू को घेरना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में रविवार को पंजाब के विभिन्न विभागों के कच्चे मुलाजिमों व भत्ता प्राप्त कर्मियों ने अपने मोर्चे के तीसरे व आखिरी दिन सिद्धू की कोठी की तरफ रोष मार्च निकाला और वहां पहुंचकर पुलिस के विरोध के बावजूद धरना दिया। बाद में बैठक का समय मिलने पर धरना समाप्त किया। इस मौके पर कच्चे मुलाजिमों ने नियमित करने और भत्ता प्राप्त कर्मियों ने न्यूनतम मजदूरी कानून लागू करने की मांग की।

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