1200 के लिए जिंदगी लग जाती है दांव पर

Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 09:59 PM IST
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राजपुरा। आतिशबाजी की चमक दमक के पीछे कितना दर्द है यह जान गंवाने वाले परिवार ही समझ सकेंगे। अपनी अजीविका के लिए पटाखा बनाने का काम करने वाले ऐसे ही परिवार सिर्फ 1200 रुपये के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। जी हां, पटाखों का एक थैला तैयार करवाने के लिए 1200 रुपये दिए जाते हैं। यह ऐसा काम है जिसको बच्चे भी कर लेते हैं। यही कारण है कि अपना पेट पालने के लिए माता पिता पटाखे बनाने का काम शुरू कर देते हैं।
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दोनों मृतक बच्चों की माता मीनू कुमारी ने बताया कि किसी पड़ोसी के कहने पर पैसे कमाने के लालच में घर में पटाखे बनाने का काम शुरू कर दिया था। इससे उसके परिवार को गुजारा चलता था। उनको नही पता था कि उसका पैसे कमाने के लालच के चलते घर में पटाखे बनाने नही बल्कि बच्चो की मौत का सामान ला रही है। जिसकी वजह से कोहराम मच जाएगा, और उसके जिगर के टुकड़ों को सदा सदा के लिए दूर कर देगा। मृतक गुरप्रीत सिंह सातवीं कक्षा में और मनप्रीत कौर पांचवी कक्षा में पढ़ती थी।

एक आतिशबाजी बनाने वाले व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पोटाश, सल्फर, बजरी और सबसे खतरनाक लाल मिसाला मिलाकर चॉक व धरती बंब बनाए जाते हैं ग्राहकों को तेज अवाज ज्यादा पंसद होती है इसलिए लाल मसाला ज्यादा मात्रा में मिलाया जाता है। एक थैला तैयार करने पर 1200 रुपये दिए जाते हैं। यह खतरनाक तो है पर आसान भी है जिसे बच्चे भी कर लेते हैं।
गौरतलब है कि शनिवार सुबह गांव जंडौली के नजदीक संत नगर में पटाखे बनाने वाले सामग्री की वजह से हुए धमाकों से मकान मालिक कृष्ण कुमार के दो बच्चे बेटी मनप्रीत कौर (12) बेटा गुरप्रीत सिंह (14) दम तोड़ चुके हैं और पड़ोस में रहने वाले पल्लवी (8) और कृष्णा (6) गंभीर रूप से घायल हैं।
डीएसपी गुरबंस सिंह बैंस का कहना है कि शनिवार को हुए हादसे के बाद जांच शुरू कर दी गई है। इलाके में किसी को गैर कानूनी तरीके से पटाखे तैयार नहीं करने दिए जाएंगे। भारी पुलिस फोर्स के साथ सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए मिर्च मंडी व नई कालोनियों में घर-घर की तलाशी ली जा रही है। पुलिस को आतिशबाजी में इस्तेमाल किए जाने वाले पोटाश, सल्फर, बजरी व अन्य सामग्री बरामद की है जिसे फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है। पटाखे तैयार करने वालों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह रिहायशी कालोनी में गैर कानूनी कारोबार बंद कर दें। पटाखे तैयार करने वालों के लाइसेंस चेक किए जाएंगे
मनप्रीत और गुरप्रीत से पहले 12 की हो चुकी है मौत
राजपुरा की मिर्च मंडी में वर्ष 2012 से 2018 तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें संजय कुमार, कांता देवी, उसका बेटा तेजिंद्र कुमार, बहू शीतल, बेटी काजल, छोटा बेटा रिंकू व एक नौकर भी धमाकों के बाद मौत के आगोश में समां चुके हैं। इतना ही नहीं महावीर मार्केट के पास रहने वाले शंकर लाल और उनकी पत्नी की भी धमाके में में मौत हो चुकी है। थोड़े समय पहले एक 12 वर्षीय लडक़ी भी पटाखों की आग से जल चुकी है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से आतिशबाजी का काम जारी है। कस्तूरबा पुलिस चौकी इंचार्ज गुरनाम सिंह ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले को लेकर जांच की जाएगी जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है।
फोटो 13 पीटीएल 06
पोस्टमार्टम के बाद मृतक गुरप्रीत का शव लेने पहुंचे उसके परिजन।च

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