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Bikaner Hospital News: 6 प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन अलर्ट, लगेगी इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: बीकानेर ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:58 PM IST
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सार
पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान के लिए अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
अस्पताल में भर्ती प्रसूताएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामले के बीच अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण की आशंकाओं को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। अस्पताल में जल्द ही अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान की जा सके और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
गौरतलब है कि संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सी-सेक्शन डिलीवरी के 10 से 15 दिन बाद छह प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। महिलाओं में यूरिन रुकना, प्लेटलेट्स में गिरावट, किडनी फेलियर और अन्य गंभीर जटिलताएं सामने आईं। सभी मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया है।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन मामलों के पीछे संक्रमण जिम्मेदार है या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। चिकित्सकों की टीम इन्फेक्शन, अत्यधिक ब्लीडिंग, मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही है।
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पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. घीया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों की एक विशेष समिति गठित की गई है। समिति सभी मरीजों की चिकित्सा स्थिति और उपचार प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा कर रही है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है, जबकि एक मरीज पहले से ही कई अंगों से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है और उसका उपचार वेंटिलेटर पर जारी है।
वहीं एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी के कई कारण हो सकते हैं और फिलहाल किसी एक कारण पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगने के बाद संक्रमण से जुड़े मामलों की जल्द पहचान हो सकेगी, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी। मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।