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Rajasthan Panchayat Elections: पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी लड़ाई तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 27 May 2026 03:54 PM IST
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सार

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश के बाद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है। सरकार पर चुनाव टालने के आरोपों के बीच मामला अब राजनीतिक और कानूनी संघर्ष बन गया है।

Political Battle Intensifies Over Rajasthan Panchayat and Civic Polls
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार

 राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर कानूनी लड़ाई अब राजनीतिक टकराव में बदलती नजर आ रही है। हाईकोर्ट द्वारा 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश के बाद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दी है। इससे साफ संकेत मिले हैं कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के संभावित सुप्रीम कोर्ट रुख को लेकर विपक्ष पहले से ही आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि यदि राज्य सरकार या राज्य चुनाव आयोग हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हैं तो पहले उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद ही कोई अंतरिम आदेश पारित किया जाए। राजनीतिक हलकों में इसे सरकार पर दबाव बनाने और चुनाव टालने के आरोपों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को सुनाए फैसले में राज्य सरकार को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट से दिसंबर तक का समय मांगा था। सरकार का तर्क था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अभी लंबित है और अन्य प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते चुनाव कराना फिलहाल संभव नहीं है।

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वहीं याचिकाकर्ताओं संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने अदालत में आरोप लगाया था कि सरकार पिछले डेढ़ साल से जानबूझकर चुनाव टाल रही है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी सरकार चुनावी माहौल और संभावित राजनीतिक नुकसान को देखते हुए स्थानीय निकाय चुनावों से बचना चाहती है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक और अनिवार्य जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट टिप्पणी की कि राजस्थान जैसे राज्य में गर्मी और बारिश को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने ओबीसी आयोग को भी 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि आयोग के “ढुलमुल रवैये” को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है तो यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी बनाम कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदल सकता है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है।

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