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Hemalata Lavanam: डकैतों को बदलकर गांव से खत्म किया अपराध, ऐसी है हेमलता लवनम की कहानी

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 18 Sep 2022 02:43 PM IST
सार

हेमलता लवनम कौन हैं? उनके परिवार में कौन कौन था। हेमलता लवनम ने सामाजिक सुधार के लिए क्या कदम उठाए?

डकैत
डकैत - फोटो : Istock
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विस्तार

महिलाएं घर बना सकती हैं तो एक अच्छा समाज भी बना सकती हैं। अगर एक मां बनकर बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकती हैं तो समाज सुधारक बनकर अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को सुधार भी सकती हैं। कई महिलाओं ने इस दिशा में प्रशंसनीय कार्य किए। इसी कड़ी में एक महिलाने समाज को स्वच्छ और रहने योग्य बनाने के लिए अपराधियों को बदलने का जिम्मा उठायाथा। इस राह पर वह सफल भी हुई। हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश की महिला समाजसुधारक हेमलता लवनम के बारें में। हेमलता लवनम को डकैतों को सही रास्ते पर लाने के लिए जाना जाता है। आखिर हेमलता लवनम कौन हैं? उनके परिवार में कौन कौन था। हेमलता लवनम ने सामाजिक सुधार के लिए क्या कदम उठाए? चलिए जानते हैं आंध्र प्रदेश की सामाजिक न्याय,मानवाधिकार और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करने वाली समाज सुधारक हेमलता लवनम के बारे में।



हेमलता लवनम का जीवन परिचय

दरअसल, हेमलता लवनम का जन्म 26 फरवरी 1932 आंध्र प्रदेश के विनुकोंडा में हुआ था। वर्तमान में ये क्षेत्र गुंटूर जिले में आता है। हेमलता के पिता तेलगू कवि गुरुम जोशुआ थे और मां का नाम मीरायमा था। हेमलता ईसाई दलित परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उन्होंने सामाजिक भेदभाव को बेहद करीब से अनुभव किया था। उनकी शादी एक समाज सुधारक से हुई थी। जिसके बाद चंबल घाटी से उनके सफर की शुरुआत हुई। 


उनके ससुर सामाजिक सुधारक गोपाराजू रामचंद्र राव थे, जो कि एक नास्तिक समाज सुधारक थे। हेमलता के ससुर ने विजयवाड़ा में एथिस्ट सेंटर की स्थापना की थी। इसके अलावा हेमलता खुद सामसर नाम की एक गैर सरकारी संगठन की को-फाउंडर थीं, जो सामाजिक न्याय, मानव अधिकार और राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करती थी। 

चंबल के डकैतों का आत्मसमर्पण


दरअसल, एक दौर था जब आंध्र प्रदेश का स्टूअर्टपुरम गाँव डकैतों और बड़े अपराधियों के लिए कुख़्यात था, लेकिन आज ये गांव मिसाल के तौर पर जाना जाता है। इसकी वजह हैं हेमलता लवनम, जिन्होंने इस गांव को डकैतों से निजात दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शादी के बाद सन 1060 में हेमलता मध्य प्रदेश के चंबल घाटी पहुंची थीं। इसी साल चंबल के डकैतों ने आत्मसमर्पण किया था।

हेमलता ने डकैत तो बांधी थी राखी

हेमलता ने पति के साथ चंबल घाटी के दो जिलों भिंड और मुरैना का दौरा किया। इस दौरान हेमलता ने डाकू मान सिंह को राखी बांध कर डकैतों की छवि में बदलाव लाने का प्रयास किया।  इसके बाद हेमलता ने यहां वास्वया स्कूल की शुरुआत की। इस स्कूल में बच्चे पेड़ के नीचे बोरे पर बैठकर पढ़ते थे। समाज सुधार आंदोलन में उन्होंने दलितों और आदिवासियों को जोड़ा और अपराधियों में सुधार लाने की दिशा में काम किया। 
 

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