कुल्लू दशहरा: शाही अंदाज में निकली भगवान नरसिंह की भव्य जलेब, ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे देवलू

संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Published by: Krishan Singh Updated Sat, 16 Oct 2021 05:55 PM IST

सार

शाही अंदाज में निकली जलेब में कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। जलेब में महाराजा कोठी के देवताओं ने शामिल होकर चार चांद लगाए। शाही जलेब देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। 
शाही अंदाज में निकली भगवान नरसिंह की भव्य जलेब
शाही अंदाज में निकली भगवान नरसिंह की भव्य जलेब - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोरोना के बीच देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दूसरे दिन शनिवार को ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान नरसिंह की भव्य जलेब निकाली गई। वाद्ययंत्रों की धुनों पर देवलू खूब झूमे। राजा की चानणी से निकली जलेब के माध्यम से नरसिंह भगवान ने ढालपुर में रक्षा सूत्र बांधा। शाही अंदाज में निकली जलेब में कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। जलेब में महाराजा कोठी के देवताओं ने शामिल होकर चार चांद लगाए। शाही जलेब देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इससे पहले शनिवार शाम करीब चार बजने से पहले देवता राजा की चानणी के पास इकट्ठा हुए। देवताओं का एक-दूसरे से भव्य देवमिलन हुआ। इसके बाद जलेब की तैयारियां शुरू हुईं। करीब सवा चार बजे राजा की चानणी से जलेब निकली। 
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जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी चली। तलवार को ढाल को पकड़कर भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। पालकी के दोनों ओर देवता चले। जलेब में महाराजा कोठी के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, खल्याणी के देवता ब्राधी वीर, जोंगा के हुरगू काली नारायण, देवता महावीर, वीरकैला आदि ने शोभायात्रा में चार चांद लगाए। राजा की चानणी से जलेब का सिलसिला शुरू हुआ। राजा की चानणी से अस्पताल रोड से होते हुए पुराने स्टेट बैंक पार्क, कलाकेंद्र के पीछे से, ढालपुर चौक होकर राजा की चानणी के पास जलेब समाप्त हुई। गौर रहे कि भगवान नरसिंह अपने पूरे क्षेत्र की परिक्रमा कर सुरक्षा की कार बांधते हैं। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह का कहना है कि दशहरा के दूसरे दिन से जलेब निकलती है। यह सिलसिला मोहल्ला तक जारी रहेगा। नरसिंह भगवान की जलेब में हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों के देवता शामिल होंगे। 

दशहरा में शामिल हुए तीर्थन के छह देवी-देवता 
वहीं, उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी से आधा दर्जन देवी-देवता दूसरे साल दशहरा में शामिल हुए हैं। वर्ष 2020 में कोरोना के चलते देवता दशहरा में नहीं आ पाए थे। लेकिन इस दशहरा में तीर्थन घाटी के देवताओं ने भगवान रघुनाथ से भव्य देवमिलन किया। बंजार की तीर्थन घाटी से बंदल की आराध्य माता गाड़ादुर्गा, नाहीं के देवता चौरासी सिद्ध, तिंदर के देवता लक्ष्मी नारायण, डिंगचा के देवता काली नाग, पेखड़ी के लोमेश ऋषि, बंदल के देवता खोडू महादेव अपने पुराने एसबीआई के पास मैदान में अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। ये सभी देवता करीब 80 किलोमीटर का सफर कर ढालपुर पहुंचे हैं। घाटी के उपरोक्त देवी-देवता सदियों से कुल्लू दशहरा की शोभा बढ़ा रहे हैं। माता गाड़ादुर्गा के कारदार मुरारी लाल शर्मा ने कहा कि तीर्थन घाटी की आराध्य माता गाड़ादुर्गा सहित अन्य देवी-देवता सदियों से दशहरा में शिरकत कर रहे हैं। सात दिनों तक सभी देवता अस्थायी शिविरों में रहकर भगवान रघुनाथ की चाकरी करते हैं। उन्होंने कहा कि लंका दहन के दिन भगवान रघुनाथ से देवमिलन कर देवता अपने देवालय की ओर रवाना हो जाएंगे। देवालय पहुंचने पर देवी-देवताओं का हारियानों की ओर से भव्य स्वागत किया जाएगा।  

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