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Dussehra 2022: रावण के अंदर थीं ये अच्छी बातें, जिन्हें हर व्यक्ति को जरूर सीखनी चाहिए

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Wed, 05 Oct 2022 11:14 AM IST
सार

Dussehra 2022: अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। 

रावण के अंदर थी ये अच्छी बातें, जिन्हें हर व्यक्ति को जरूर सिखनी चाहिए
रावण के अंदर थी ये अच्छी बातें, जिन्हें हर व्यक्ति को जरूर सिखनी चाहिए - फोटो : iStock
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विस्तार

Dussehra 2022: अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इस साल 05 अक्टूबर 2022 को ये पर्व मनाया जाएगा। रावण को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। कहा जाता है कि रावण बहुत शक्तिशाली राजा, महाविद्वान, सर्वज्ञानी और भगवान शिव का परम भक्त था। लेकिन उसके अहंकार की वजह से उसका सर्वनाश हुआ। कई जगहों पर रावण की भी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि रावण में कुछ गुण भी थे, जिनसे आज भी लोगों को कुछ सीख लेनी चाहिए। आइए जानते हैं रावण को परमज्ञानी क्यों कहा जाता है...  



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परिवार के साथ हमेशा खड़े रहना 
रावण के अंदर भले ही लाख बुराइयां रही होंगी, लेकिन वो अपने भाई-बहन के सम्मान को लेकर हमेशा समर्पित रहा। विभीषण के विचार रावण से बिल्कुल अलग थे, फिर भी उसने अपने भाई को खुद से अलग नहीं किया। अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए ही रावण ने सीता हरण किया। शूर्पणखा का अपमान ही उसके गलत कदम उठाने का कारण बना। जब भी मुश्किल की घड़ी आई तो पूरे परिवार के साथ खड़ा रहा। 

प्रजा की हितों का ध्यान 
ऐसी मान्यता है कि रावण के राज्य में उसकी प्रजा कभी दुखी नहीं हुई। रावण के राज्य में उसकी प्रजा सुख और संपत्ति से परिपूर्ण थी। वह बहुत ही कुशल राजा था जो अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखता था। रावण की प्रजा रावण से अत्यंत संतुष्ट थी। 

मर्यादा का उल्लंघन न करना
माता सीता का हरण करना रावण के जीवन की सबसे बड़ी गलती थी। ये बात वह भी जानता था, लेकिन उसने कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। उसने स्त्री के सम्मान को जिस तरह बनाये रखा वही संयम आज भी हर व्यक्ति में होना चाहिए।

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वेदों का ज्ञान 
कहा जाता है कि रावण को चारों वेदों और 6 उपनिषदों का ज्ञान था। रावण के दस सिर इसी ज्ञान का प्रतीक थे। इसी ज्ञान और बुद्धि के बल पर ही रावण का सम्मान उसके शत्रुओं तक में था। साथ ही माना जाता है कि उसे संगीत में गहरी दिलचस्पी थी और वे एक बेहद निपुण वीणा वादक भी था। 

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