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Krishna Janmashtami 2022: भगवत गीता में समाहित हैं चारो वेद और 18 पुराण, जानिए गीता ज्ञान का सार

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 18 Aug 2022 11:56 AM IST
सार

Janmashtami Quotes Bhagavad Gita: महाभारत के युद्ध में जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को विचलित होते देखा तो उन्होंने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए अर्जुन को गीता ज्ञान दिया। यह गीता ज्ञान महाभारत के भीष्म पर्व के 18 अध्यायों के कुल 700 श्लोकों में समाहित है।

Bhagavad Gita Facts: कर्म करो, फल की चिंता मत करो, अच्छे कर्मों का फल अवश्य सही वक्त पर मिलता है।
Bhagavad Gita Facts: कर्म करो, फल की चिंता मत करो, अच्छे कर्मों का फल अवश्य सही वक्त पर मिलता है। - फोटो : Social media
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विस्तार

Janmashtami Quotes Bhagavad Gita: महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था। कौरवों और पांडवों की सेनाएं कुरुक्षेत्र के मैदान में आमने सामने खड़ी थी। इस दौरान अर्जुन ने जब अपने सामने अपने ही भाई बंधुओं के देखा तो वह विचलित हो गए और ठान लिया कि महज जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपने ही भाई बंधुओं का खून नहीं बहाएंगे। वहीं जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को विचलित होते देखा तो उन्होंने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए अर्जुन को गीता ज्ञान दिया। यह गीता ज्ञान महाभारत के भीष्म पर्व के 18 अध्यायों के कुल 700 श्लोकों में समाहित हैं। भागवत गीता की रचनाओं को ना केवल भारत के विभिन्न धर्मों की मान्यता हासिल है, बल्कि एक समय में दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिक रहे अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी इस महान ग्रंथ की सराहना की थी। ब्रह्मांड और इससे जुड़े तथ्यों को जानना उनके लिए काफी आसान हो जाता था। आइए,यहां हम संक्षेप में जानने के प्रयास करते हैं कि आखिर कैसे भगवान कृष्ण ने अपने कर्तव्य पथ से विचलित अर्जुन को वापस विश्व कल्याण और धर्म रक्षा के लिए प्रेरित किया। साथ ही यह भी जानने का प्रयास करेंगे के इससे हमारे जीवन पर क्या असर पड़ने वाला है।



भगवत गीता की मुख्य बातें 

  • बिना वजह क्यों चिंता करते हो? क्यों और किससे डरते हो? कौन तुम्हे मार पाएगा? आत्मा अजर और अमर है, वह न जन्म लेती है, न ही मरती है। 
  • कर्म करो, फल की चिंता मत करो, अच्छे कर्मों का फल अवश्य सही वक्त पर मिलता है।
  • जो भी करो, उसे भगवान को समर्पित कर दो, ऐसा करने से जीवन सदा चिंता से मुक्त रहेगा और तुम सच्चे आनंद की प्राप्ति कर सकोगे। 
  • परिवर्तन इस संसार का नियम है, जो हुआ वो अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह तो अच्छा है ही, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा।
  • तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लेकर आए थे जो तूने खो दिया?
  • तुमने क्या पैदा किया था, जो नष्ट हो गया, जो तुमने लिया यहीं से लिया, जो दिया, यही पर दिया. जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, और कल किसी और का होगा।
  • परिवर्तन संसार का नियम है, जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है. एक क्षण में तुम अगाध संपत्ति के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण तुम दरिद्र हो जाते हो।
  • न शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि जल वायु एवं आकाश से बना है और एक दिन इसी में मिल जाएगा। आत्मा अजर अमर है, फिर तुम क्या और कौन हो?
  • मेरा तेरा छोटा बड़ा अपना पराया मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।

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