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फिरोजाबाद: दुष्कर्म के बाद 11 वर्षीय बालिका की हत्या करने वाले युवक को फांसी की सजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 19 Sep 2021 12:10 AM IST

सार

फिरोजाबाद जिले में 24 अप्रैल 2019 को दुष्कर्म के बाद 11 वर्षीय बालिका की हत्या कर दी गई थी। दो साल बाद शनिवार को इंसाफ की घड़ी आई और अदालत ने इस हत्याकांड के दोषी को फांसी की सजा सुनाई। 
दोषी को लेकर जाती पुलिस
दोषी को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फिरोजाबाद के थाना लाइनपार क्षेत्र में दो वर्ष पूर्व 11 साल की बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने के बाद उसके साथ दुष्कर्म और ईंट से कुचलकर हत्या करने के दोषी वीरेंद्र बघेल को अपर जिला जज एवं विशेष जज पास्को एक्ट प्रथम अरविंद कुमार यादव द्वितीय ने फांसी की सजा सुनाई है। जज ने आदेश में कहा कि दोषी को फंदे पर तब तक लटकाया जाए जब तक उसका दम नहीं निकल जाए।
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घटना थाना लाइनपार क्षेत्र के एक मोहल्ला की 24 अप्रैल 2019 की है। 11 वर्षीय बालिका को उसी मकान में किराये पर रहने वाले शिकोहाबाद के माढ़ई फतेहपुर निवासी वीरेंद्र बघेल पुत्र हरीराम उर्फ हरी सिंह बहला-फुसलाकर ले गया था।


बालिका को सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसके चेहरे को ईंट से कुचलकर हत्या कर दी थी। हत्या के मामले में मृतक बालिका की मां ने वीरेंद्र बघेल के खिलाफ थाना लाइनपार में अभियोग दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की विवेचना करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।

सख्त सजा दिलाने की थी मांग
मामला सेशन कोर्ट के सुपुर्द होकर सुनवाई को अपर जिला जज एवं विशेष जज पास्को एक्ट प्रथम अरविंद कुमार यादव द्वितीय के न्यायालय में पहुंचा। शासन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक कमल सिंह ने आरोपी शादीशुदा होने के साथ दो बच्चों का पिता था। जबकि मृतक बालिका नाबालिग थी।

इसके कारण उसे सख्त सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के कई उदाहरण पेश किए। अपर जिला जज अरविंद कुमार यादव द्वितीय ने फाइल पर उपलब्ध साक्ष्य,गवाहों के बयान एवं घटना की वीभत्सता को ध्यान में रखते हुए दोषी वीरेंद्र कुमार बघेल को हत्या एवं दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा सुनाई है।

जज ने दिया ये आदेश
उन्होंने कहा कि दोषी को तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उसका दम नहीं निकल जाए। धारा 363 एवं 201 में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा एवं पांच-पांच हजार का अर्थदंड लगाया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी दोषी के चेहरे पर कोई शिकन दिखाई नहीं दी। जबकि न्यायालय के बाहर उसके माता-पिता सजा सुनकर बिलखने लगे। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच उसे जेल भेज दिया।

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