पितृपक्ष : संतानों के तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 11:14 PM IST
कासगंज सोरों की हरि की पौड़ी घाट पर अस्थि विसर्जन कराते लोग
कासगंज सोरों की हरि की पौड़ी घाट पर अस्थि विसर्जन कराते लोग - फोटो : KASGANJ
विज्ञापन
ख़बर सुनें
सोरों(कासगंज)। सोमवार से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। 17 दिन के इस पितृपक्ष में पितरों की आत्मा शांति के लिए तर्पण का दौर शुरू हो जाएगा। संतानों द्वारा पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए तर्पण किया जाएगा। तीर्थनगरी सोरों के हरि की पौड़ी घाट पर तर्पण से आत्मशांति और मोक्षप्राप्ति की विशेष मान्यता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यहां तर्पण करने से पितरों का विशेष आर्शीवाद संतानों को मिलता है। इस पक्ष में वृक्ष, पशु पक्षी और जलचरों में भी पितरों के वास की मान्यता है।
विज्ञापन

धर्मशास्त्रों के अनुसार पितरों का पितृलोक चंद्रमा के उध्र्वभाग में माना गया है। दूसरी और अग्रिहोत्र कर्म से आकाश मंडल के समस्त पक्षी भी तृप्त होते हैं। पक्षियों के लोक को भी पितृलोक कहा जाता है। तीसरी ओर पितर हमारे वरुणदेव का आश्रय लेते हैं और वरुण देव जल के देवता हैं। अत: पितरों की स्थिति जल में भी बताई गई है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक काले तिल, कुश, चावल, जौ से तर्पण करना चाहिए। पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती ही है बल्कि मोक्ष भी प्राप्त होता है।

ज्योतिषाचार्य की बात-
ज्योतिष कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित जगदीश महेरे का कहना है कि पितृपक्ष में पितर पृथ्वीलोक पर आकर अपनी संतानों द्वारा किए गए तर्पण से तृप्त होते हैं और आर्शीवाद देते हैं। ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि शास्त्रों के अनुसार वृक्षों में पीपल, बरगद और बेल का वृक्ष, पक्षियों में कौवा, हंस, गरूण, पशुओं में कुत्ता, गाय, हाथी, जलचरों में मछली, कछुआ, नाग को पितरों का प्रतीक माना गया है।
वृक्षों की मान्यता-
पीपल- यह वृक्ष पवित्र वृक्ष है। इसमें जहां विष्णु का निवास है वहीं यह वृक्षरूप में पितृदेव हैं।
बरगद- इस वृक्ष में साक्षात शिव निवास करते हैं। बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पितरों की मुक्ति के लिए शिव की पूजा करनी चाहिए।
बेल- यदि पितृपक्ष में शिवजी को अत्यंत प्रिय बेल का वृक्ष लगाया जाए तो अतृप्त आत्मा को शांति मिलती है।
पक्षियों की मान्यता-
कौवा- कौवे को अतिथि आगमन का सूचक और पितरों का आश्रय स्थल माना जाता है।
गरूण- गरूण भगवान विष्णु के वाहन है। इनके नाम पर ही गरूण पुराण है।
पशुओं की मान्यता-
गाय- गाय में सभी देवी देवताओं का निवास माना गया है इसलिए ये पूजनीय है।
कुत्ता- कुत्ते को यम का दूत माना जाता है। इसलिए इसकी मान्यता है।
जलचरों की मान्यता
मछली- भगवान विष्णु ने एक बार मतस्य का अवतार लेकर मनुष्य जाति के असित्व को जल प्रलय से बचाया था।
कछुआ- हिंदूधर्म में कछुआ बहुत ही पवित्र उभयचर जंतु है। जो जल की सभी गतिविधियों को जानता है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00