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चेहरे पर सूजन, पेशाब में झाग: ये संकेत बताते हैं कि किडनी में है गड़बड़ी, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 12 Mar 2026 11:12 AM IST
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सार

World Kidney Day: एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार चेहरे-हाथ-पैरों में सूजन, थकान और पेशाब में झाग किडनी रोग के अहम लक्षण हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने धूम्रपान, मधुमेह, ज्यादा नमक और फास्टफूड को किडनी बीमारी की बड़ी वजह बताया है।

Swelling and Foamy Urine May Signal Kidney Disease Doctors Warn
एसएन मेडिकल कॉलेज का किडनी विभाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

चेहरे, हाथ-पैरों में सूजन, थकान और पेशाब में झाग बन रहे हैं, तो यह किडनी रोग के महत्वपूर्ण लक्षण हैं। इनको नजरअंदाज कतई न करें और तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं। चिकित्सक किडनी रोग की बढ़ती बीमारी के लिए धूम्रपान, मधुमेह, फास्टफूड, अधिक नमक और उच्च रक्तचाप को बड़ी वजह बता रहे हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 75-80 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 30 से कम उम्र के 15 फीसदी, 31 से 50 साल के 50 फीसदी और बाकी 51 से अधिक उम्र के हैं। इनमें 70 फीसदी मरीजों में अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप की वजह से बीमारी बन रही है।
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मोटापा, फास्टफूड-डिब्बा बंद भोजन, धूम्रपान और कम पानी पीना भी वजह है। अगर किसी के उल्टी हो रही है, सांस फूल रही है, हाथ-पैर और चेहरे पर सूजन है। थोड़ा कार्य करने पर थकान हो जाती है। सबसे खास पेशाब करते वक्त झाग का गुच्छा बन रहा है तो किडनी में संक्रमण हो सकता है। ओपीडी में आने वाले 35 फीसदी मरीजों ने इन लक्षणों को नजरअंदाज किया। इससे उनका रोग बढ़ गया।
 

10 साल की उम्र में भी पथरी
एसएन की किडनी रोग विभाग की डॉ. कैरवी भारद्वाज ने बताया कि पानी कम पीने, नॉनवेज खाने और हरी सब्जी नहीं खाने से युवाओं में पथरी की बीमारी बढ़ रही है। कई मरीजों में फैमिली हिस्ट्री भी मिलती है। यहां तक कि 10 साल के बच्चे में भी पथरी मिल रही है। ऐेसे में अगर किसी के परिवार में किडनी की बीमारी की हिस्ट्री रही है तो वह अपनी जांच जरूर करा लें।
 

इसलिए बनती है समस्या
सूजन: पानी का संतुलन गड़बड़ाना। पानी भरपूर पीने पर भी पेशाब कम आना।
थकान: बिना किसी वजह से खून की कमी होना, कमजोरी होना।
पेशाब में झाग: किडनी में संक्रमण से पेशाब के जरिये प्रोटीन निकलना।

इन बातों का रखें ध्यान
- पैकेट बंद भोजन और पेय सामग्री, फास्ट फूड से बचें।
- धूम्रपान, शराब से दूर रहें, भोजन में नमक कम करें।
- रक्तचाप, मधुमेह और वजन को नियंत्रित करें।
- किडनी रोग नहीं है तो रोजाना 3-5 लीटर पानी पीएं।
- पैदल चलें, व्यायाम करें और हरी सब्जी, सलाद खाएं।

 

जीवनशैली बदली और उपचार से हुआ सुधार
वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकार अनिल शुक्ला का कहना है कि 2012 में दिल्ली एम्स में मेरी किडनी 75 फीसदी खराब बताकर एक तरह से इलाज से हाथ खड़े कर दिए गए। ऐसे में बिहार के भागलपुर स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में तीन महीने भर्ती रहकर प्राकृतिक चिकित्सा (पानी, हवा, मिट्टी, तापमान और नियंत्रित आहार) अपनाई। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में एलोपैथी उपचार करा रहा हूं, इससे स्थिति में सुधार है।

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