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1989 का विधानसभा चुनाव ः बदले समीकरणों से चरण सिंह के सियासी वारिस को मिली हार

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 01:06 AM IST
Vidhan sabha Election 1989
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अभिषेक शर्मा
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प्रदेश में दसवां विधानसभा चुनाव 1989 में हुआ। जो जिले की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण और नुकसानदायक भी रहा। इस चुनाव में जिले के दिग्गज नेता चौ.राजेंद्र सिंह के खिलाफ समीकरणों का ऐसा वार छेड़ा गया कि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार के चलते उन्हें सीएम पद से पीछे हटना पड़ा। उनके स्थान पर प्रदेश में स्थापित हुई जनता दल सरकार में मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। उन दिनों अलीगढ़ जनपद के साथ-साथ पश्चिमी यूपी के लिए ये सबसे बड़ी खबर रही कि चौ.राजेंद्र सिंह चुनाव हार गए।
यह सभी जानते हैं कि इगलास सीट से सियासत करने वाले चौ.राजेंद्र सिंह उस समय के देश में कांग्रेस विरोधी दिग्गज नेता चौ.चरण सिंह के बेहद करीबी थे। उनके करीबी होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके पिता का टिकट काटकर मोहनलाल गौतम को देने से खफा चरण सिंह ने अपनी पत्नी को यहां मोहनलाल गौतम के सामने चुनाव लड़ाकर हराया था। राजेंद्र सिंह को अपनी पार्टी का प्रदेश में सर्वे-सर्वा बना रखा था। इन्हीं तमाम वजहों से उन्हें उनका ‘सियासी वारिस’ भी कहा जाता था। यूपी की सियासत को अलीगढ़ से बैठकर राजेंद्र सिंह ही संभालते थे। चूंकि 1987 में चरण सिंह का देहांत हो चुका था। इसलिए इस चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी चरण सिंह गुट ने चौ.राजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश किया था। इसी अनुसार वे चुनाव भी लड़े।

2700 मत निरस्त, मात्र 64 वोटों से मिली हार
उनके सामने कांग्रेस सेवादल के युवा नेता गोंडा क्षेत्र के ही चौ.बिजेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया था। इस चुनाव में चौ.राजेंद्र सिंह के मुख्य चुनाव अभिकर्ता की भूमिका निभाने वाले सियासी जानकार योगेश शर्मा एडवोकेट बताते हैं कि उससे कुछ समय पहले खैर का मानपुर कांड होकर चुका था, जिसमें कई किसानों की जान गई थी और बड़ा किसान आंदोलन हुआ था, जिसमें बाबा महेंद्र सिंह टिकैत ने धरना तक दिया था। इसी मंच से चौ.राजेंद्र सिंह ने तत्कालीन जिलाधिकारी को कॉलर पकड़कर उतार दिया था। कुल मिलाकर उस समय चौ.राजेंद्र सिंह अपने सियासी उरूज पर थे। मगर चुनाव मतगणना के समय जिला प्रशासन की नाराजगी का परिणाम यह रहा कि उनके 2700 मत निरस्त किए गए। इसके चलते बिजेंद्र सिंह मात्र 64 मतों से विजयी घोषित किए गए। खुद योगेश शर्मा ने पुन: मतगणना का आवेदन दिया, मगर जिला प्रशासन ने उसे खारिज कर दिया।
दूसरे दिग्गज किशनलाल दिलेर को मिली हार
प्रदेश में उस समय भाजपा लगातार अपना बहुमत बढ़ाने का काम कर रही थी। अपने जिले से अतरौली और कोल सीट भाजपा की परंपरागत सीट बनती जा रही थीं। तीसरी शहर सीट पर भी भाजपा मजबूत होने लगी थी। मगर 1989 के इस चुनाव का परिणाम रहा कि कल्याण सिंह और केके नवमान बीजेपी से जीते। किशनलाल दिलेर को कांग्रेस के रामप्रसाद देशमुख ने हरा दिया। इसके अलावा जनता दल ने खैर, हाथरस, सासनी, सिकंदराराऊ व गंगीरी पर जीत दर्ज की। वहीं कांग्रेस बरौली, इगलास व कोल पर जीती थी।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में आठ राष्ट्रीय दल भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, इंडियन कांग्रेस सोशलिस्ट, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी व लोकदल बी मैदान में थे, जबकि एक राज्य स्तरीय दल ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक और 26 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 208 पर जनता दल ने ने जीत दर्ज की। कांग्रेस मात्र 94 सीटों पर रह गई और 57 पर भाजपा जीती।
ये था दसों सीटों का परिणाम
- 1 लाख 85 हजार 645 मतों वाली हाथरस सीट पर जनता दल के रामशरण सिंह 43745 मत पाकर जीते और कांग्रेस के हरिबाबू शर्मा 21960 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 78 हजार 046 मतों वाली सासनी सीट पर जनता दल के रमेश करन 36599 मत पाकर जीते और निर्दल धर्मपाल सिंह 18752 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 79 हजार 857 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर जनता दल के सुरेश प्रताप गांधी 34783 मत पाकर जीते और निर्दलीय नेकराम शर्मा 25326 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 75 हजार 237 मतों वाली गंगीरी सीट पर जनता दल के बाबू सिंह यादव 33052 मत पाकर जीते और कांग्रेस के तिलक सिंह 20528 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 77 हजार 577 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा के कल्याण सिंह 47842 मत पाकर जीते और कांग्रेस के डॉ. अनवार खां 46332 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 03 हजार 200 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर भाजपा के केके नवमान 51982 मत पाकर जीते और जनता दल के ख्वाजा हलीम 42834 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 834 मतों वाली कोल सीट पर कांग्रेस के रामप्रसाद देशमुख 32737 मत पाकर जीते और भाजपा के किशनलाल दिलेर 31585 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 69 हजार 041 मतों वाली इगलास सीट पर कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 37258 मत पाकर जीते और जनता दल के राजेंद्र सिंह 37194 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 73 हजार 720 मतों वाली बरौली सीट पर कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह चौहान 27842 मत पाकर जीते और निर्दल दलवीर सिंह 20172 मत पाकर हारे।
- 1 लाख 81 हजार 837 मतों वाली खैर सीट पर जनता दल के जगवीर सिंह 45694 मत पाकर जीते और कांग्रेस के शिवराज सिंह 30469 मत पाकर हारे।

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