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सिविल लाइंस पुलिस भ्रष्ट, खुन्नस में सीज कर दी गाड़ी

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 23 May 2018 12:42 AM IST
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गाड़ी सीज किए जाने से भड़के चायल से भाजपा विधायक संजय गुप्ता ने सिविल लाइंस पुलिस पर हमला बोलते हुए उसे भ्रष्ट करार दिया है। विधायक ने कहा है कि पुलिस की अपराधियों से साठगांठ है। उन्होंने इसके खिलाफ मोर्चा खोला और इसी की खुन्नस में पुलिस ने बदले की भावना से कार्रवाई की।
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विधायक ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि घटना जिस वक्त हुई, वह लखनऊ में थे। पुलिस ने बिना कोई शिकायत मिले ही उनकी गाड़ी सीज कर दी। गाड़ी सीज किए जाने के पीछे पुलिस की ओर से जो कारण बताया गया, वह मनगढ़ंत है। घटना के समय सफारी उनका ड्राइवर चला रहा था न कि भतीजा। भतीजा गाड़ी में बैठा जरूर था लेकिन उसकी किसी से कोई बातचीत नहीं हुई। बताया कि कागजात गाड़ी में ही अब भी रखे हुए हैं।


विधायक के मुताबिक शहर में झलवा स्थित एक पार्क में कई तरह की गैरकानूनी गतिविधियां होती हैं। इनमें ड्रग्स तस्करी भी शामिल है। इस पार्क का मालिक सिविल लाइंस स्थित एक व्यापारी है और उसकी सिविल लाइंस पुलिस से साठगांठ है। पिछले दिनों इस मामले की शिकायत करने पर डीजीपी ने कार्रवाई के आदेश दिए, जिसके बाद पुलिस को वहां छापा मारना पड़ा। इसी खुन्नस में उनकी गाड़ी बिना किसी कारण के क्रेन से उठवा ली गई और सीज कर दिया गया। विधायक ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले की शिकायत की। साथ ही मंगलवार को शहर पहुंचकर एडीजी और एसएसपी के साथ बातचीत की।

ट्रेनी दरोगा पर कार्रवाई सवालों के घेरे में
विधायक की गाड़ी सीज करने वाले ट्रेनी दरोगा एसके निगम पर कार्रवाई सवालों के घेरे में है। दरोगा का कहना था कि कागजात नहीं मिलने पर गाड़ी सीज की गई। जबकि कार्रवाई कुछ घंटे बाद देर रात दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस दौरान उसका पक्ष जानने की भी कोशिश नहीं की गई। जानकारों की मानें तो प्रारंभिक तौर पर मिली शिकायत के आधार पर दरोगा को लाइन हाजिर किया जा सकता था। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की जाती है। लेकिन, यहां ऐसा नहीं किया गया। आननफानन में दरोगा को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई दबाव में की गई।

दबी जुबान में रही चर्चा, ऐसे कैसे करेगा कोई काम
दरोगा पर कार्रवाई का मामला पुलिस महकमे में दिन भर चर्चा का विषय बना रहा। इस संबंध में पुलिसकर्मी कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं हुए। हालांकि दबी जुबान से उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इस तरह ड्यूटी करने पर किसी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से पुलिसकर्मियों का मनोबल कमजोर होगा। उनका कहना था कि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि बिना जांच किए ही महज शिकायत के आधार पर कार्रवाई का तरीका सही नहीं है।

क्या था मामला
घटना सोमवार शाम लगभग छह बजे की है। पुलिस के मुताबिक, हाईकोर्ट कर्मी सिविल लाइंस में विधायक संजय गुप्ता के आवास के सामने से जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक तभी विधायक का भतीजा सफारी गाड़ी बैक करने लगा। इसी दौरान टक्कर लगने से हाईकोर्ट कर्मी गिर पड़े। उन्होंने विरोध किया तो नोकझोंक होने लगी। सूचना पर पहले डायल 100 और कुछ देर बाद स्थानीय थाने की पुलिस पहुंची। विधायक के भतीजे ने पुलिस के साथ अभद्रता की। साथ ही मांगने पर गाड़ी के कागजात भी नहीं दिखाए। इसके बाद पुलिस गाड़ी थाने उठवा लाई। मामला ऊपर तक पहुंचा तो अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। बाद में गाड़ी छोड़ने का भी फैसला किया गया। हालांकि फोन करने पर युवक ने गाड़ी लेने आने से इंकार कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने गाड़ी सीज कर दी थी।

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