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हाईकोर्ट : पुलिस की सारी सेवाएं एक, पीएसी के जवानाें का सिविल पुलिस में किया जा सकता है स्थानांतरण

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 12 Aug 2022 12:13 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि पीएसी के जवानों को सशस्त्र कांस्टेबुलरी और सिविल पुलिस सहित पुलिस की अन्य सेवाओं में स्थानांतरित किया जा सकता है। कोर्ट ने स्थानांतरित किए गए दीवान, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को एक सप्ताह में स्थानांतरित किए गए स्थान पर ज्वाइनिंग करने का आदेश दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पीएसी से सशस्त्र कांस्टेबुलरी में स्थानांतरित किए गए जवानों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने प्रदेश पुलिस की सभी सेवाओं को एक मानते हुए पीएसी में तैनात जवानों की ओर से दाखिल याचिका को रद्द कर दिया।




हाईकोर्ट ने कहा कि पीएसी के जवानों को सशस्त्र कांस्टेबुलरी और सिविल पुलिस सहित पुलिस की अन्य सेवाओं में स्थानांतरित किया जा सकता है। कोर्ट ने स्थानांतरित किए गए दीवान, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को एक सप्ताह में स्थानांतरित किए गए स्थान पर ज्वाइनिंग करने का आदेश दिया।



विभाग से कहा कि जवान अगर स्थानांतरित किए गए स्थान पर एक सप्ताह में ज्वाइन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई को स्वतंत्र होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने सुनील कुमार चौहान व 186 अन्य तथा 27 पीएसी जवानों की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते दिया है।

मामले में पीएसी में तैनात दीवान, कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल का स्थानांतरण सात मई 2022 को आर्म्स कांस्टेबुलरी में कर दिया गया था। याचियों ने इस स्थानांतरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचियों की ओर से तर्क दिया गया था कि आर्म्स कांस्टेबुलरी दूसरा विभाग है।
 
 
दूसरे विभाग में पीएसी जवानों का स्थानांतरण नहीं हो सकता है। उन्हें पीएसी में ही एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा स्थानांतरण किसी बोर्ड द्वारा नहीं किया गया है। इसलिए सात मई को एडिशनल सुपरिटेंडेंट पीएसी के द्वारा किया गया स्थानांतरण गलत है। 
 

इस पर हाईकोर्ट ने स्थानांतरण के आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में सुनवाई आगे बढ़ी तो अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और स्थायी अधिवक्ता विक्रम बहादुर यादव की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि यूपी में सिविल पुलिस, आर्म्स कांस्टेबुलरी, जीआरपी, अग्निशमन पुलिस, वन रक्षक पुलिस, माउंटेन पुलिस और जल पुलिस सभी एक हैं। 
 

उन्होंने पुलिस एक्ट की धारा दो, तीन और धारा 12 में इंस्पेक्टर जनरल की शक्ति का हवाला दिया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई केसों का हवाला दिया। कहा कि प्रशिक्षित पीएसी कर्मियों को बेहतर प्रशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल पुलिस के साथ काम करना जरूरी है। 
 

जनहित में इस तरह का निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने सरकारी दलीलों को स्वीकार करते हुए पीएसी जवानों की ओर से दाखिल याचिकाओं को रद्द कर दिया और उन्हें स्थानांतरित स्थान पर ज्वाइन करने का आदेश दिया।
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