सिंचाई विभाग में करोड़ों का गोलमाल, शासन ने शुरू कराई जांच

अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jul 2021 02:06 AM IST

सार

  • मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद कमिश्नर ने दिए जांच के निर्देश, जांच टीम गठित
  • चहारदीवारी निर्माण में मानकों का नहीं हुआ पालन, बगैर निर्माण के ही कर दिया भुगतान
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demo pic... - फोटो : irrigation pattern
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विस्तार

पिछले दिनों बरेली में तैनात सिंचाई विभाग के दो अफसरों का नाम गोमती रिवरफ्रंट घोटाला में सामने आने के बाद अब मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच शुरू करा दी है। करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में गोलमाल की जांच के लिए कमिश्नर आर. रमेश कुमार ने शासन के निर्देश पर जांच समिति गठित कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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सुर्खा (बदायूं) के रहने वाले सैयद इकबाल असलम ‘बबलू’ ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री के नाम शिकायती पत्र भेजा था। इसमें कहा गया है कि सिंचाई खंड कार्यालय बरेली में वर्ष 2016-17 में सिंचाई कार्यशाला की आवासीय कॉलोनी की चहारदीवारी के निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ। निर्माण के दौरान नाले को बर्बाद कर दिया गया। पुरानी दीवार और नाले से निकलीं ईंटों का प्रयोग निर्माण कार्य में हुआ। 


मगर, जिम्मेदारों ने कागजों में नई ईंटों की खरीद दिखाकर बजट हजम कर लिया। कार्यशाला के मेन गेट के भीतर सड़क के निर्माण में भी खेल हुआ है। एक्सपेंशन ज्वॉइंट, सीसी रोड की इंटरलॉकिंग का ब्रिक वर्क और वाटर ड्रेनेज के कार्य किए ही नहीं गए, लेकिन कागजों में निर्माण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। निर्माण कार्य के लिए खरीदे गए सात सौ कट्टे सीमेंट भी अब जम चुका है।

आरोप है कि विभाग में पदों पर प्रोन्नति और तबादले में भी खेल हो रहा है। गन मेटल की सप्लाई में सिंचाई खंड कार्यशाला में रखे स्क्रैप गन मेटल, मशीन का उपयोग कर औद्योगिक अधिष्ठान के कर्मचारियों को लगाकर ढलाई और मशीनिंग का कार्य किया गया। उधर, इसी कार्य के लिए निविदा, अनुबंध दिखाकर बजट का बंदरबांट हुआ। 2019-20 में टीएंडपी मद से मशीन शॉप की मशीनों की मरम्मत को मिले बजट से सिर्फ रंगाई पुताई का काम हुआ। बाकी बजट को आपस में बांट लिया गया। विभाग के अभियंताओं पर आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की भी मुख्यमंत्री से मांग की गई है।

शिकायतकर्ता से मांगे साक्ष्य और शपथपत्र
शासन के निर्देश पर शुरू हुई जांच में जांच अधिकारी सिंचाई कार्यशाला के सहायक अभियंता विजय प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रकरण की प्रारंभिक जांच के लिए शिकायतकर्ता बबलू से शपथपत्र मांगा गया है। इसे शासनादेश कार्मिक अनुभाग-1 की व्यवस्था के तहत दो सप्ताह में देने को कहा गया है। वहीं, आरोपों के संबंध में साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए भी पत्र लिखा है। उधर, बताते हैं कि शासन से जांच शुरू होने पर विभाग में खलबली मची हुई है। शिकायतकर्ता से ही साक्ष्य मांगकर उस पर दबाव बनाया जा रहा है।

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