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प्रशासन की फिर नहीं माने किसान, कहा- हमें चाहिए पूरा भुगतान

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 01:33 AM IST
क्रेशर बंद होने पर हंगामा करते किसान।
क्रेशर बंद होने पर हंगामा करते किसान। - फोटो : LAKHIMPUR
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गोला गोकर्णनाथ। अपने बकाया भुगतान के लिए आंदोलन कर रहे किसानों को प्रशासन एक बार फिर प्रशासन मनाने में नाकाम रहा। भुगतान करा देंगे। ऐसे आश्वासन को किसानों ठुकरा दिया। कहा कि बहुत दिनों से यही हो रहा है। अब तो पूरे बकाया भुगतान के बाद ही धरना खत्म होगा।
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बकाया गन्ना भुगतान को चीनी मिल को बंद करा संयुक्त किसान मोर्चा तीन दिसंबर से धरना-प्रदर्शन कर रहा है। शनिवार की दोपहर डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी संजीव सुमन और सीडीओ अनिल कुमार सिंह किसान मोर्चा के धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसान नेताओं को बकाया गन्ना भुगतान में सोमवार तक 25 करोड़ और पांच जनवरी तक कुल 100 करोड़ और फरवरी अंत तक शेष संपूर्ण भुगतान कराने का आश्वासन दिया। किसान नेताओं ने कहा कि भरोसा नहीं है। पहले भुगतान उसके बाद में धरना प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा। अधिकारियों और किसानों की ओर से तर्क और तीखे पक्ष रखे गए। डीएम ने भारतीय किसान यूनियन के एक बड़े नेता का वायरल वीडियो और ऑडियो किसानों को सुनाकर किसानों से मिल चलने देने की अपील की। लेकिन वार्ता सफल नहीं हुई। आखिरकार अधिकारियों को दूसरी बार बिना किसी निराकरण के वापस जाना पड़ा। इसके पूर्व भी डीएम एसपी और सीडीओ को 4 दिसंबर को कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद वापस लौटना पड़ा था। इस मौके पर अमनदीप सिंह संधू, अंजनी दीक्षित, रामनिवास वर्मा, महेंद्र वर्मा, महेश चंद्र वर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।

जो मिल गन्ना ले जाना चाहता है उसे ले जाने दे - एसपी
एसपी संजीव सुमन ने कहा कि अपनी मांग को लेकर धरना- प्रदर्शन करना ठीक है लेकिन यदि अन्य किसान चीनी मिल को गन्ना देना चाहते हैं तो उसे रोकना कानूनन ठीक नहीं है। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि वह और डीएम खुद जाएंगे तोल गेट पर और यदि कोई किसान गन्ना ले जाना चाहता है, तो वह गन्ना ले जाएगा और अगर आपका मन करे तो हमारे ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दीजिएगा। फोर्स का कोई भी नहीं आएगा। लेकिन, जो किसान गन्ना देना चाहते हैं, उन्हें रोकने का किसी को हक नहीं है। डीएम ने भी कहा कि मिल बंद करना समस्या का निदान नहीं है।
अंबावत गुट ने मिल चलाने को शुरू किया धरना
शनिवार सुबह 9:00 बजे चीनी मिल के मेन गेट पर भारतीय किसान यूनियन अंबावत गुट के जिलाध्यक्ष महादेव प्रसाद वर्मा बजाज चीनी मिल चलाने के पक्ष में साथियों के साथ धरने पर बैठ गए। महादेव प्रसाद वर्मा ने कहा कि क्षेत्र का किसान बकाया गन्ना भुगतान न मिलने से परेशान है लेकिन मिल बंद कराना समस्या का समाधान नहीं है। डीएम, एसपी और सीडीओ ने जिस तरीके से भुगतान कराने की बात बड़े भरोसे के साथ की है, उस पर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों को बात मान लेनी चाहिए। मिल बंद होने से किसानों का गन्ना सूख रहा है। छोटे काश्तकारों की समस्या बढ़ी है।
धरनास्थल पर किसान नेता श्री कृष्ण वर्मा की हालत बिगड़ी
जिस समय डीएम एसपी और सीडीओ धरनास्थल पर पहुंचे उस समय किसान नेता श्री कृष्ण वर्मा धरना प्रदर्शन स्थल पर नहीं थे। वह किसानों के आग्रह पर मकसूदापुर बजाज चीनी मिल किसान आंदोलन में गए थे। वापस आने पर धरना प्रदर्शन पर किसानों संबोधित करते समय उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल सीएचसी भर्ती कराया गया
फोटो-अमनदीप सिंह संधू
अमनदीप सिंह संधू को भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट से निकाला गया
शनिवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के अध्यक्ष तराई क्षेत्र उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के सरदार अजीत सिंह ने अमनदीप सिंह संधू को तराई क्षेत्र उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के उपाध्यक्ष पद से निष्कासित कर दिया है। उन पर संगठन विरोधी कार्य करने एवं संगठन के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। अमनदीप सिंह संधू ने कहा कि वह किसानों के हर संघर्ष में साथ खड़े हैं।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष श्री कृष्ण वर्मा ने बताया कि यह आंदोलन नेताओं का नहीं किसानों का है। डीएम ने जो पहले वादा किया था वह पूरा नहीं किया। जिले की अधिकारियों की चीनी मिल से मिलीभगत है। पिछला संपूर्ण बकाया और इस वर्ष का 14 दिन का भुगतान लेकर ही चीनी मिल चलने देंगे। किसानों की सहमति से ही निर्णय लिया जाएगा। चीनी मिल चलाने के पक्ष में जो लोग धरने पर बैठे हैं वह किसान नहीं है, बल्कि ट्रक यूनियन चीनी मिल के कर्मचारी हैं। वह किसान नहीं है। अंबावत गुट अस्तित्व विहीन है। जिनकी अगुवाई में प्रदर्शन किया जा रहा है उनके दोनों लड़के चीनी मिल में नौकरी करते हैं।
आंदोलन का राजनीतिकरण हो गया है
बजाज ग्रुप के डायरेक्टर डीएवी सिंह और शशिभूषण राय ने कहा कि चीनी मिल बंद होती है तो क्षेत्र का किसान प्रभावित होगा। आंदोलन का राजनीतिकरण हो गया है इसलिए इस समस्या का कोई निराकरण नहीं हो पा रहा जो दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान भाइयों को विवेकपूर्ण निर्णय लेना होगा। जो हालात आज हैं वैसे हालात आगे नहीं होंगे। बकाया भुगतान कराने के लिए अधिकारियों ने जो आश्वासन दिया है उसी अनुरूप भुगतान कराया जाएगा। किसान भाई मिल चलने दे और भरोसा करें

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