फसल ही नहीं, अरमान भी बहा ले गई बाढ़

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 12:21 AM IST
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फसल ही नहीं, अरमान भी बहा ले गई बाढ़
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अफजलगढ़। तीन दिन पहले अफजलगढ़ क्षेत्र में बैनली नदी उफान पर आई तो बाढ़ का पानी खेतों में भर गया। बात यहां तक रुकती तो ठीक थी, लेकिन नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि खेतों में खड़ी फसल और पेड़ तक उखड़कर बह गए। तीन दिन के तेज बहाव में बनैली नदी के तटस्थ किसानों की फसलों के साथ उनकी खेतों की जमीन तक न बची। इसमें बाढ़ में केवल फसल ही नहीं बही, बल्कि कई किसानों के अरमान भी बह गए। कोई ठेके पर जमीन लेकर खेती कर रहा था तो कोई इस बार फसल के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद लगाए बैठा था। किसी को बेटी की शादी करनी थी तो किसी को कर्ज चुकाना था। लेकिन सारे सपने टूट गए। अब किसानों को सरकार से मिलने वाले मुआवजे से ही संतोष करना पडे़गा।
बेटे की शादी करनी है, बाढ़ में बह गई उम्मीद
आलमपुर गांवड़ी के किसान जयप्रकाश सिंह ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ माह बाद बेटे की शादी होनी है। उनके पास तीन बीघा जमीन शाहपुर जमाल के मौज्जे में बनैली नदी के तट पर थी। तीन दिन पूर्व बनैली नदी की बाढ़ से उनकी गन्ने की फसल के साथ दो बीघा जमीन भी नदी में समा गई। जिससे परिवार के आगे आर्थिक तंगी हो हुई है। उन्हें जमीन व फसल सहित सात लाख रुपये का नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

फसल के साथ बह गए यूकेलिप्टस के पेड़
किसान परवेंद्र सिंह निवासी शाहपुर जमाल ने बताया कि उनकी नदी के किनारे एक एकड़ जमीन थी, जिसमें यूकेलिप्टस के पेड़ खड़े थे। कुछ दिन बाद पेड़ों को बेचना था। बनैली नदी की बाढ़ से खेत के साथ उनके एक एकड़ जमीन में खड़े लाखों रुपये के पेड़ भी बह गए। किसान ने एक एकड़ जमीन व फसल सहित 16 लाख रुपये का नुकसान होने की बात कही है।
जहां लहलहा रही थी फसल, वहां बह रही बनैली नदी
गांव शाहपुर जमाल निवासी बालयोगेंद्र ने बताया कि वह छोटा सा किसान है। परिवार के पालने लायक की जमीन है। किसी तरह से गुजर बसर कर रहा था। बनैली नदी की बाढ़ ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया। उसके खेतों में नदी किनारे दो बीघा गन्ने की लहलहाती फसल थी, जिसे बनैली नदी लील गई। इससे एक माह पूर्व भी बनैली नदी ने उनकी तीन बीघा जमीन काटकर खेतों में रास्ता बना लिया था। किसान के अनुसार उसे करीब 15 लाख रुपये की हानि उठानी पड़ी।
न फसल बची, न पेड़ ही बचे
गांव शाहपुर जमाल निवासी दिवान सिंह ने बताया कि नदी किनारे आलमपुर गांवड़ी के मौज्जे में उसकी जमीन है। उसकी एक बीघा जमीन नदी में समा गई। खेत में खड़े यूकेलिप्टस के पेड़ और गन्ने की फसल पानी के साथ बह गई, जिससे किसान को तीन लाख रुपये की क्षति पहुंची है। इसके अलावा किसान राजपाल सिंह, करन सिंह, सुशील कुमार, राकेश सिंह, राजकुमार सिंह, योगेंद्र सिंह, संजय कुमार, दयाराम सिंह, बालकराम आदि ने तहसील में जाकर तहसीलदार को खेतों व फसलों के हुए नुकसान के संबंध में प्रार्थना पत्र सौंपा है।
बैलगाड़ी से गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल
ग्रामीण मूलचंद सिंह ने बताया कि तीन दिन पूर्व उनकी पुत्रवधू को प्रसव पीड़ा हुई। हाईवे से पीड़ित के घर तक करीब 200 मीटर की दूरी तक चार फीट पानी भरा था। कार वहां तक नहीं पहुंच सकी, उन्होंने बैलगाड़ी का सहारा लेकर महिला को मुख्य मार्ग तक पहुंचाया। वहां से उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
पांच एकड़ में बोया था धान, सारा बर्बाद हो गया
गांव भज्जावाला निवासी किसान भीम सिंह का कहना है कि उसने पांच एकड़ धान बोया था, जिसमें चार एकड़ काट दिया था जो भीगने से सभी धान बर्बाद हो गया है। इसमें उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा उनकी चार बीघा जमीन में गन्ना बोया था। उसकी तीन बीघा गन्ना रामगंगा नदी में बह गया ओर भूमि कटान हो गया है। करीब चार बीघा का पांच कुंतल उड़द भी बर्बाद हो गया है। इस तरह करीब उन्हें दस लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। आलमपुर गांवड़ी निवासी सीमा देवी का कहना है कि उन्होंने करीब दो एकड़ बारीक धान बोया था जो सभी पानी में भीगने से बर्बाद हो गया है। इसके अलावा उनके चार बीघा खड़े धान में बनैली नदी का पानी चल रहा है। उन्हें करीब दो लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
बाढ़ से बदतर हो रहे गांवों के हालात
अफजलगढ़। पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश से जहां एक ओर किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, वहीं दूसरी ओर बनैली नदी के रौद्र रूप ने ग्रामीणों बेहाल कर दिया है। दल्लीवाला की नई कॉलोनी में ती से चार फीट पानी भर गया। इससे लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। रास्तों में पानी भरने के कारण उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। फिरोज खान, मोहम्मद ताहिर, मूलचंद सिंह, लीलावती, ओमप्रकाश सिंह, सरोज देवी, हरिओम सिंह, नीरज देवी, आसमां खातून, परसादी सिंह आदि ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते काटते थक गए हैं, कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि सुनने के लिए तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने एसडीएम से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेकर समस्या से छुटकारा दिलाए जाने की गुहार लगाई है।

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