बदायूंः बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के चल रहा था अस्पताल, सिटी मजिस्ट्रेट ने किया सील

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 25 Feb 2020 02:02 AM IST
hospital sealed
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बदायूं। सिटी मजिस्ट्रेट ने सोमवार को शहर में चल रहे कई अस्पतालों पर छापा मारा। इस दौरान एक नर्सिंग होम में कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर नहीं मिला, जबकि उस अस्पताल में छापे से कुछ ही देर पहले एक महिला का प्रसव कराया गया था। वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि प्रसव नर्स ने कराया था। स्वास्थ्य विभाग में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। हालांकि अस्पताल स्टाफ रजिस्ट्रेशन होने का दावा कर रहा है। अनियमितताएं पाए जाने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल सील करवा दिया।
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सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने सोमवार शाम को लगभग छह बजे शहर में स्थित कई नर्सिंग होम में छापा मारकर रजिस्ट्रेशन कागज चेक किए। सबसे पहले उन्होंने इंद्रा चौक स्थित नैना आई केयर और गुप्ता मैटरनिटी होम में जाकर रजिस्ट्रेशन के कागज देखे। वहां सब कुछ ठीक मिला। उसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने बरेली रोड स्थित बीडीएन होली फैमली हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। यहां एक हॉल में पूरा अस्पताल चलता हुआ मिला। उन्होंने मौजूद स्टाफ से अस्पताल के रजिस्ट्रेशन संबंधी अभिलेख मांगे, लेकिन मौके पर कोई नहीं दिखा सका। उसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल में बनाए गए ऑपरेशन थियेटर और डिलीवरी रूम का निरीक्षण किया। यहां पर गंदगी पड़ी हुई थी। वहां भर्ती मरीजों से वार्ता की, तो पता चला कि एक महिला की डिलीवरी कुछ ही देर पहले हुई है। जब डिलीवरी करने वाले डॉक्टर के बारे में जानकारी ली, तो वहां पर कोई भी डॉक्टर नहीं मिला। मौजूद लोगों ने बताया नर्स ने डिलीवरी कराई थी। इधर, अस्पताल संचालक मोहम्मद आमिर का कहना है अस्पताल में मौके पर डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें कागज दिखाने का मौका नहीं दिया।

मौके पर नहीं मिले रजिस्ट्रेशन के कागज
स्वास्थ्य विभाग एसीएमओ डॉ. केके जौहरी ने बताया कि उनके पास जो विभाग का रजिस्टर हैं, जिसमें अस्पतालों के नाम का रजिस्ट्रेशन दर्ज है, उस रजिस्टर पर इस अस्पताल का नाम नहीं है। हालांकि वहां पर मौजूद स्टाफ ने रजिस्ट्रेशन होने को दावा किया, लेकिन मौके पर उनके पास कोई कागज नहीं थे। बाद में व्हाट्सएप के माध्यम से कहीं से रजिस्ट्रेशन के कागज मंगाए और उसमें चार डॉक्टर पंजीकृत दिखाए, इसमें लेकिन मौके पर उनमें से एक भी डॉक्टर नहीं मिला। हालांकि एक महिला खुद को डॉक्टर बता रही थी, लेकिन उनका वहां पर रजिस्ट्रेशन नहीं था।
किसी भी डॉक्टर का नाम नहीं लिखा था, मेडिकल स्टोर भी चल रहा था अंदर
अस्पताल में मानकों की अनदेखी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे अस्पताल के अंदर कहीं पर भी किसी डॉक्टर का नाम अंकित नहीं था, जिससे यह पता लग सके कि यहां पर कौन सा डॉक्टर पंजीकृत है। सिटी मजिस्ट्रेट ने पाया कि अस्पताल के अंदर एक मेडिकल स्टोर भी संचालित था, जहां से दवाएं मरीजों को दी जा रही थीं। स्टोर संचालक उसका लाइसेंस भी नहीं दिखा सका। हालांकि चेकिंग के दौरान जब सिटी मजिस्ट्रेट मरीजों से बात कर रहे थे, उस वक्त मौका पाकर स्टाफ ने वहां से दवाइयों को हटा दिया।
भर्ती मरीजों को भेजा सरकारी अस्पताल
अस्पताल को सील करने से पहले एसीएमओ ने वहां पर भर्ती मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके लिए उन्हें जिला अस्पताल से एंबुलेंस को बुलाया। एक प्रसूता को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं एक भर्ती मरीज अपने घर चला गया।
बीडीएन होली फैमिली हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। स्टाफ मौके पर रजिस्ट्रेशन पेपर नहीं दिखा सका। कुछ ही देर पहले डिलीवरी भी हुई थी, पर मौके पर डॉक्टर नहीं मिला। मेडिकल स्टोर भी वहां संचालित था। मानकों की अनदेखी है, इसके चलते उसे सील किया गया है। अस्पताल संचालक सीएमओ को अभिलेख दिखाएं और मानकों को पूरा करें। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
प्राइवेट अस्पताल में स्टाफ नहीं था, रजिस्ट्रेशन के बारे में मैंने सुना है कि उसने अपना रजिस्ट्रेशन दिखाया था। उसको मैं मंगलवार सुबह ऑफिस जाकर देखूंगा कि वास्तव में रजिस्ट्रेशन है भी या नहीं।
- डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ

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