UP: पीडीडीयू-गया रेल रूट पर पहली बार कवच के साथ चली बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस, अब नहीं होगी ट्रेनों की टक्कर
Chandauli News: पीडीडीयू-गया रेल रूट पर पहली बार कवच के साथ बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस ट्रेन चली। सरमाटांर से निमियाघाट, पीडीडीयू फ्लाईओवर केबिन से भभुआ सड़क, सासाराम से फेसर में कवच शुरू हुआ। इससे ट्रेनों की आमने- सामने की टक्कर नहीं होगी।
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हावड़ा-दिल्ली रूट पर पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से गया के बीच 163 किलोमीटर तक कवच को चालू कर दिया गया है। सोमवार की रात फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस सफलता पूर्वक चलाई गई। पीडीडीयू गया रूट पर सरमाटांर से निमियाघाट, पीडीडीयू फ्लाईओवर केबिन से भभुआ सड़क, सासाराम से फेसर में कवच प्रणाली को शुरू कर दिया गया है। इससे चालू होने से ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर अब नहीं होगी।
सोमवार को पीडीडीयू गया रूट पर तीन सेक्शन में कवच वर्जन 4.0 (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) को चालू कर दिया गया। इसमें धनबाद और पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के सरमाटांर से निमियाघाट (76 किमी), पीडीडीयू फ्लाईओवर केबिन से भभुआ सड़क (43 किमी) और सासाराम से फेसर (44 किमी) सेक्शन शामिल हैं।
यदि पूर्व मध्य रेलवे की बात करें तो कुल 256.3 रूट किलोमीटर पर कवच को चालू कर दिया गया है। इसमें पूर्व मध्य रेल का मानपुर-सरमाटांर (93.3 किमी) सेक्शन भी शामिल है।
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सोमवार को फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस चली। यह फेसर से 03:02 बजे गुजरी और सासाराम 03:50 बजे पहुंची। भभुआ-पं. दीन दयाल उपाध्याय के फ्लाईओवर केबिन सेक्शन पर यह भभुआ से 04:39 बजे निकली और पं. दीन दयाल उपाध्याय के एफओसी से 05.20 बजे गुजरी।
भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है कवच
कवच वर्जन 4.0, भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का नवीनतम और सबसे उन्नत संस्करण है। इसे परिचालन फीडबैक और स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों के आधार पर निरंतर तकनीकी अपग्रेड के माध्यम से विकसित किया गया है। अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) की ओर से अनुमोदित, कवच 4.0 रेलवे सुरक्षा में एक बड़ी प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। इसे विशेष रूप से भारत के विविध, उच्च-घनत्व और मल्टी-लाइन रेल नेटवर्क की परिचालन मांगों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस तरह काम करता है कवच
कवच सुरक्षित ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने के लिए माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और रेडियो संचार प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। जब एक पूर्व-निर्धारित दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता चलता है, तो यह सिस्टम लोको पायलट को सचेत करता है और आवश्यकता पड़ने पर ऑनबोर्ड उपकरणों के माध्यम से स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है।
अधिकारी बोले
पं. दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के 163 किमी तक कवच सिस्टम को चालू कर दिया गया है। इसकी शुरुआत अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की ओर एक और कदम है। अन्य इलाकों में भी तेजी से कवच लगाने का काम किया जा रहा है। कवच लगने के बाद ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर नहीं होगी। -सरस्वती चंद्र, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्व मध्य रेलवे