खतरे के निशान के पार हुई सरयू, रबी की बुआई पर संकट

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 11:33 PM IST
saru river
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अमर उजाला ब्यूरो
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देवरिया। जिले में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे 100 से अधिक गांवों के किसान परेशान हैं। उन्हें डर सता रहा है कि रबी की बुआई वे कैसे करेंगे। खरीफ की फसल बारिश के चलते पहले ही बर्बाद हो चुकी है। जलस्तर सामान्य होने के समय में नदी उफान पर है। सरयू नदी का जलस्तर पांच सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। सरयू खतरे के निशाल से 85 सेमी ऊपर बह रही है।
र्तु्तीपार केंद्रीय जल आयोग के जेई प्रकाश ओझा ने बताया कि सरयू नदी में एल्गिन ब्रिज की अपस्ट्रीम बाराबंकी से करीब सात लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है। इसके अलावा पहाड़ों पर भारी बारिश हो रही है जिससे अक्तूबर के महीने में नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। कर्मचारियों को जलस्तर पर निगरानी रखने को कहा गया है। नदी खतरे के निशान से 85 सेमी ऊपर बह रही है।

भागलपुर प्रतिनिधि के अनुसार, बृहस्पतिवार रात से सरयू नदी में पानी आना शुरू हुआ और नदी में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी होने लगी। शुक्रवार की शाम सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को 85 सेमी लांघते हुए 67.35 मीटर पर पहुंच गई है।
लोगों को दी गई नदी से दूर रहने की सलाह
बरहज के एसडीएम ध्रुव शुक्ला ने बताया कि संबंधित तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव के आसपास लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। कोई भी व्यक्ति नदी के जल भराव वाले इलाके में न जाय। इसको लेकर तत्काल प्रभाव से बाढ़ चौकियां स्थापित कर शरणालयों को स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
नदी किनारे गांवों को ज्यादा खतरा
सरयू का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के किसानों को चिंता सताने लगी है। सलेमपुर तहसील क्षेत्र के बलिया उत्तर, बलिया दक्षिण, सहियागढ़, नेमा, चकिया धरहरा, डुमरी खरवनिया, पिंडी, खेमादेई, चुरिया नदौली, कौसड़, सरैया, बरहज तहसील के देवसिया, भागलपुर, परसिया देवार, विशुनपुर देवार, भदिला प्रथम, कटईलवा, कपरवार, मेहियवा, महेन, पैना, मईल, छित्तुपुर, गोंडौली, नरियांव, मईल, नरसिंडाड़, तेलियाकला, अमौना, मेहियवां, बेलडाड़, कपरवार आदि गांवों में रबी की बुवाई का संकट खड़ा हो गया है।
सरयू नदी के सभी तटबंध सुरक्षित हैं। नदी का जलस्तर जल्द ही कम हो जाएगा। इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। बाढ़ खंड व तहसील प्रशासन मुस्तैद है।
- एनके जाड़िया, एक्सईएन बाढ़ खंड
मार्ग तक पहुंचा नदी का पानी
बरहज में नदी खतरे के निशान 66.50 मीटर से एक मीटर पांच सेमी ऊपर बह रही है। शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे नदी 67.40 मीटर पर बह रही थी। लेकिन शाम करीब पांच बजे नदी खतरे के निशान से एक मीटर पांच सेमी ऊपर 67.55 मीटर पर बहने लगी थी। नदी में अचानक आए बाढ़ से बरहज नगर के आरती, परशुराम, महिला सहित 12 घाटों की सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं। एसडीएम ध्रुव शुक्ल ने बताया कि जलस्तर में उफान आया है। एहतियात के तौर पर तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। जलस्तर में गिरावट आने की संभावना है। बरहज क्षेत्र के कपरवार स्थित उग्रसेन पुल के निकट गोरखपुर जनपद के कोलखास गांव की सड़कों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। दूसरी ओर मदनपुर थाना क्षेत्र का भदिला प्रथम गांव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गया है। जिससे एक बार फिर ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। कुछ जगहों पर सड़क पर घुटनों तक पानी पहुंच जाने से आवागमन दुरुह हो गया है।
गोर्रा और राप्ती का जलस्तर बढ़ने से खतरा बढ़ा
रुद्रपुर। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर क्षेत्र की नदियों के जलस्तर पर दिख रहा है। दो दिन में गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इस साल तीसरी बार गोर्रा और राप्ती नदी लाल निशान की तरफ बढ़ रही है। नदियों के जलस्तर को देख तटवर्ती गांव के लोगों में दहशत है। दो दिन में गोर्रा नदी का जलस्तर करीब ढाई मीटर तक बढ़ा है।
शुक्त्रस्वार को गोर्रा नदी का जलस्तर 68.90 मीटर और राप्ती नदी 68 मीटर पर बह रही थी। दोनों नदियों का लाल निशान 70.50 मीटर है। दोनों के बढ़ते जलस्तर को देखकर कछार और दोआबा के लोगों के माथे पर चिंता सता रही है। तिघरा मराछी बांध पर भेड़ी गांव के निकट धंसे बोल्डर पर कटान का खतरा बढ़ गया है। दो सप्ताह पहले यहां बोल्डर पिचिंग भरभरा कर गिर गई थी। गोर्रा नदी नरायनपुर और बहोरा दलपतपुर गांव पर कटान कर रही है। क्षेत्र के नगवा, पिड़हनी, गायघाट, रामपुर, इस्लामबाद, सिकड़िया, सोनबह, बेलवा दुबौली, सोनबरसा, मठिया माफी, पिड़रा आदि गांव की आबादी और कृषि योग्य भूमि पर पानी लगा हुआ है। धान की फसल गवां चुके किसान नदियों के जलस्तर को देख अब गेहूं की बुआई को लेकर चिंतिंत हैं। किसानों ने डाला और गायघाट गांव के समीप रेग्यूलेटर से आबादी के बीच भरे पानी को बाहर निकलवाने की मांग की है।

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