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Gonda News: आयुष्मान योजना में सेंधमारी, दो हजार रुपये में बना रहे फर्जी गोल्डन कार्ड

संवाद न्यूज़ एजेंसी,गोंडा Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Tue, 09 Aug 2022 06:49 PM IST
सार

आयुष्मान योजना में फर्जी कार्ड बनाने और इलाज कराने की गारंटी जालसाज ले रहे हैं। गोल्डेन कार्ड 2000 रुपये में बनाए जा रहे हैं।

सीएमओ कार्यालय पर गोल्डन कार्ड का सत्यापन करते डॉ. संदीप तिवारी।
सीएमओ कार्यालय पर गोल्डन कार्ड का सत्यापन करते डॉ. संदीप तिवारी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

प्रधानमंत्री की ओर से लागू की गई देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना में जालसाजों ने सेंधमारी कर दी है। लाभार्थी सूची में नाम न होने के बावजूद 2000 रुपये में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। यही नहीं पैनल अस्पताल के कर्मचारियों से मिलीभगत कर इन कार्डों पर इलाज भी कराया जा रहा है। हालांकि गोल्डन कार्ड बनवाने से लेकर इलाज कराने तक की गारंटी लेने वाले गैंग का रेट अलग ही होता। अब सीएमओ कार्यालय में विशेष सत्यापन में हर रोज फर्जी गोल्डन कार्ड के मामले सामने आ रहे हैं। पकड़े जाने वाले फर्जी लाभार्थी लिखित माफीनामा देकर फर्जी गोल्डन कार्ड बनवाने की कहानी बयां कर रहे हैं।



आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध जिले के 2,91,564 परिवारों के करीब दस लाख सदस्यों का गोल्डन कार्ड बनाकर उन्हें हर साल पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक 70 फीसदी से अधिक पात्रों का गोल्डन कार्ड नहीं बन सका। इसका फायदा उठाकर जालसाज उसी पते व नाम पर दूसरे व्यक्ति से पैसे लेकर गोल्डन कार्ड बना दे रहे हैं। पैनल अस्पतालों के स्टाफ से मिलीभगत करके फर्जी कार्ड के धारक के नाम व पते का सत्यापन करा लिया जाता है। ऐसे में सूची में नाम न होने के बावजूद लोगों को दूसरे के नाम पर लाभार्थी बनाकर महंगे इलाज का लाभ दे दिया जाता है। ये गोरखधंधा अस्पताल व जालसाजों की मिलीभगत से संचालित किया जा रहा है।


मुख्य कार्यपालक अधिकारी एबी-पीएमजेएवाई की ओर से जारी आदेश के क्रम में सीएमओ कार्यालय में गोल्डन कार्ड का गहन सत्यापन किया जा रहा है। इसमें पिछले दिनों से छह से अधिक फर्जी गोल्डन कार्ड के मामले पकड़े गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के जिला सूचना प्रबंधक अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि सत्यापन में फर्जी गोल्डन कार्ड के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में लाभार्थियों की पड़ताल कराई जा रही है।

बेलसर के कनपुरिया पुरवा मौजा अकौनी निवासी देवतादीन ने सत्यापन में पकड़े जाने पर 1900 रुपये में गोल्डन कार्ड बनवाने की बात स्वीकार की। सीएमओ कार्यालय में कार्ड का सत्यापन कराने पहुंचे मातादीन का गोल्डन कार्ड फर्जी पाए जाने पर कर्मचारियों ने लिखित माफीनामा लेकर कार्ड जब्त कर लिया। सीएमओ को लिखे गए माफीनामे में देवतादीन ने बताया कि उसका ऑपरेशन होना था। अकौनी चौराहा स्थित जनसेवा केंद्र के संचालक से संपर्क किया। उन्होंने कार्ड बनाने के लिए 2000 रुपये मांगे। उन्हें 1900 रुपये देकर कार्ड बनवा लिया था। अब फर्जी गोल्डन कार्ड स्वेच्छा से जमा कर रहा हूं, भविष्य में ऐसा काम नहीं करूंगा।

बहराइच की रहने वाली माया देवी शहर के आयुष्मान पैनल से जुड़े कृष्णा हॉस्पिटल में इलाज कराने पहुंची। गोल्डन कार्ड होने पर नि:शुल्क इलाज के लिए पंजीकरण कराया। यहां तक की ऑपरेेशन के लिए भर्ती भी करा दिया गया। संदेह होने पर सीएमओ कार्यालय से गहन सत्यापन किया गया तो माया का गोल्डन कार्ड फर्जी पाया गया। माया की ओर से पेश किए गए राशन कार्ड में नौ सदस्य थे, जिनकी मुखिया का नाम माया देवी था। सत्यापन में माया देवी खुद के अलावा किसी अन्य सदस्य का परिचय पत्र नहीं पेश कर सकीं। पूछने पर बताया कि एक जनसेवा केंद्र पर दो हजार रुपये देकर कार्ड बनवाया था। सीएमओ कार्यालय की ओर से माया का फर्जी कार्ड जब्त कर लिया गया।

सीएमओ कार्यालय के एक कर्मचारी की मानें तो कि गोल्डन कार्ड में फर्जीवाड़ा करने वाले जालसाज कार्ड बनवाने से लेकर इलाज करवाने तक की गारंटी लेते हैं। कर्मी ने बताया कि जिला अस्पताल के पास स्थित एक निजी अस्पताल में बैठे कुछ लोग अधिक पैसे लेकर गोल्डन कार्ड बनाने से लेकर इलाज करवाने तक की गारंटी ले लेते हैं। जब कोई व्यक्ति महंगा ऑपरेशन कराने इस अस्पताल में जाता है तो तुरंत इसकी सूचना जालसाजों तक पहुंच जाती है। फिर वे मरीज से संपर्क कर गोल्डन कार्ड बनाने की डीलिंग शुरू करते हैं। गोल्डन कार्ड बनाने के पैसे पहले ले लिए जाते हैं, उसके बाद पूरे इलाज के संभावित खर्च का आधा पैसा डिस्चार्ज होने से पहले जालसाज ले लेते हैं। इस फर्जीवाड़े के केस में अस्पताल संचालक व कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि गोल्डन कार्ड में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए विशेष सत्यापन की व्यवस्था की गई है। सीएमओ कार्यालय में गहन सत्यापन के बाद ही इलाज की स्वीकृति दी जाएगी। यदि कोई जालसाज इस तरह के कार्य करते पकड़ा गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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