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खेतों में कटान के साथ ही बीमारी बढ़ी

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 12:21 AM IST
गोंडा में करनैलगंज के नकहरा गांव में नाव से आवागमन करते लोग। -संवाद
गोंडा में करनैलगंज के नकहरा गांव में नाव से आवागमन करते लोग। -संवाद - फोटो : GONDA
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करनैलगंज/नवाबगंज (गोंडा)। बाढ़ की त्रासदी कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। जलस्तर कम होने से खेतों में कटान हो रही है। करीब दो हजार बीघा की भूमि बाढ़ की चपेट में है। पशुओं में बीमारी फैल रही है। सौ से अधिक मजरों के लोग सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं। सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घटते हुए बुधवार को खतरे के निशान से नीचे आ गया। नदी की कटान से करीब दो हजार बीघे से अधिक भूमि पूरी तरीके से कटकर नदी में समाहित हो चुकी है। करीब एक दर्जन स्थानों पर जबरदस्त रेन कट बने हुए हैं। जो बांध के लिए भविष्य में खतरा बन सकते हैं।

बुधवार को जिन गांव में बाढ़ का पानी भर गया है, वहां से स्थिति जस की तस है। सरयू नदी में अचानक बढ़े जलस्तर नदी का जलस्तर बीते दो दिन पहले खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर बांध के लिए खतरा बन गया था। धीरे-धीरे जल स्तर घटते हुए खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। मगर दुश्वारियां और खतरा कम नहीं हुआ है। पशु पालक अपने मवेशियों को लेकर परेशान हैं। कई पशु संक्रामक बीमारी के चपेट में आ गए हैं।

गांवों में भरा पानी
माझा रायपुर नैपुरा, कमियार एवं नकहरा के एक दर्जन मजरों में पानी अभी भी भरा हुआ है। जहां लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही है। एसडीएम हीरालाल ने बताया कि जलस्तर घटने से बांध के लिए खतरा कम हो गया है जिन गांव में पानी भर गया था, वहां से निकलने लगा है। अभी भी गांव में करीब फीट पानी भरा हुआ है। बाढ़ से प्रभावित गांव के ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और लगातार निगरानी की जा रही है ग्रामीणों को राशन मुहैया करा दिया गया है।
जलस्तर घटने से कटान के बढ़े आसार
नवाबगंज। तरबगंज में सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार की मध्यरात्रि से कम होने लगा है। नदी का जलस्तर बढ़ने तथा फिर घटने से तटीय क्षेत्रों में कटान का खतरा गंभीर हो गया है। कटान से ढेमवाघाट पुल के लगभग सौ मीटर पहले सड़क पूरी तरह से कटान के खतरे में आ गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार के दोपहर लगभग 4.30 बजे का जलस्तर 93 रहा, जोकि खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर है। बृहस्पतिवार की सुबह तक नदी खतरे के निशान से नीचे जाने का अनुमान है। नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ने और घटने के बाद गिरावट होने से सरयू नदी के तटीय इलाकों में कटान का खतरा गंभीर होता नजर आ रहा है।
नदी के कटान से माझा क्षेत्र के गांव के कई गांवों वाले के घरों का कटान से अस्तित्व खतरे में आ गया है। क्षेत्र के दत्तनगर, गोकुला, तुलसीपुर माझा, साखीपुर, माझा राठ, जैतपुर, दुर्गा गंज माझा, महेशपुर, कटराभोगचंद, दुल्लापुर इस्माइलपुर लोलपुर सहित किसानों के हजारों हेक्टेयर फसलें जलमग्न होने के बाद चौपट हो गई है। घटतेे हुए जलस्तर से मवेशियों के चारे का अभी संकट बरकरार है। नवाबगंज से लखनऊ-अयोध्या बस्ती गोरखपुर को जोड़ने वाला ढेमवा घाट मार्ग नदी के कटान के कगार पर बना हुआ है। जिलाधिकारी के निर्देश पर अधिकारियों ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री का वितरण किया।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के टीकाकरण के साथ राहत सामग्री का वितरण कराया जा रहा है। प्रभावित को हर स्तर से मदद की जा रही है। नदी के जलस्तर में की आ रही है।
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- सुरेश कुमार सोनी, अपर जिलाधिकारी

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