खेल खोलने वाले जेई को बीडीओ ने किया कार्यमुक्त

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 20 Sep 2021 10:50 PM IST
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हरदोई। भरखनी विकास खंड में मनरेगा के तहत हो रही घपलेबाजी का खुलासा करने वाले ग्राम्य विकास अभिकरण के अवर अभियंता (जेई) पर गाज गिर गई है। कार्यालय से गैरहाजिर रहने और अनुशासनहीनता के आरोप में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने अवर अभियंता को ब्लाक से कार्य मुक्त कर दिया है।
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भरखनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आमतारा में मनरेगा के तहत दो लाख रुपये के एस्टीमेट पर तीन लाख चालीस हजार रुपये का भुगतान किए जाने का खुलासा अमर उजाला ने 12 अगस्त के अंक में किया था। इसके बाद मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने इस मामले की जांच कराई थी। जांच में ग्राम्य विकास अभिकरण के भरखनी ब्लाक के अवर अभियंता (जेई) दीपक राजपूत को दोषी ठहरा दिया गया था। अवर अभियंता को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया था।

अवर अभियंता दीपक राजपूत ने जब अपना जवाब अधिकारियों को भेजा, तो भरखनी विकास खंड में मनरेगा के तहत चल रहे कई खेल उजागर हो गए। अवर अभियंता ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि शंभूरतन के खेत से पूरब पुलिया तक भूमि विकास कार्य से जो आगणन बनाया गया, वास्तव में वहां चकमार्ग है ही नहीं। यहां नहर पटरी है। छह माह पहले ही सिल्ट सफाई हुई थी और नहर से निकली मिट्टी ही इस कार्य के लिए पर्याप्त थी। 3,66,085 रुपये का एस्टीमेट बनाया गया था, लेकिन मौके की स्थिति देखकर इसे संशोधित कर 2,02,126 रुपये कर दिया गया था। बीडीओ ने भी इसी को प्रशासनिक स्वीकृति दी थी, लेकिन भुगतान ज्यादा का कर दिया।
मामला खुला तो बीडीओ ने लीपापोती शुरू कर दी। जिस कार्य पर आठ अगस्त तक ही 3,45,000 रुपये का भुगतान हो चुका था, उसका संशोधित आगणन बन ही नहीं सकता। इसको लेकर सोमवार को खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद भरखनी विकास खंड के जिम्मेदारों में खलबली मच गई। इसका असर भी शाम होते होते नजर आ गया। खंड विकास अधिकारी भरखनी प्रमेंद्र पांडे ने अवर अभियंता दीपक राजपूत को ब्लाक से कार्यमुक्त कर दिया। इस संबंध में बीडीओ ने ग्राम्य विकास अभिकरण के अधिशासी अभियंता को पत्र भेज दिया। अवर अभियंता पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
राजनीति में लिप्त, हस्ताक्षर के नाम पर वसूली
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता को भेजे पत्र में खंड विकास अधिकारी ने अवर अभियंता दीपक राजपूत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि दीपक राजपूत कभी कभी ही कार्यालय आते हैं। शासकीय कार्यों में रुचि नहीं लेते हैं। पंचायत घरों पर मापांकन के बाद काउंटर हस्ताक्षर के नाम पर वसूली करते हैं। राजनीति में लिप्त रहते हैं और अनुशासनहीनता करते हैं। मातहतों से अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

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