Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   IT Raids on Akhilesh Yadav aides: income tax Raids were also held in Bengal, Maharashtra and Karnataka before elections

अखिलेश यादव के करीबियों पर IT रेड: बहुत कुछ कहती है छापेमारी की यह कहानी! बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी पड़े थे चुनाव से पहले छापे

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sat, 18 Dec 2021 02:54 PM IST

सार

उत्तर प्रदेश में शनिवार को आयकर विभाग के छापों को लेकर सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जाएगा, विपक्षी दलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापों का दौर भी उतना ही बढ़ता जाएगा। कहते हैं ऐसे छापों से उनकी पार्टी बिल्कुल नहीं डरने वाली बल्कि उनका रथ और उनके कार्यक्रम लगातार होते रहेंगे...
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते दो दिनों से एक चर्चा आम थी। चर्चा थी कि अखिलेश और शिवपाल यादव की मुलाकात के बाद कहीं ऐसा न हो कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापे शुरू हो जाएं। चर्चाएं बकायदा सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। लोगों ने उन पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं और शनिवार सुबह समाजवादी पार्टी के नेताओं के घरों पर आयकर विभाग की छापेमारी शुरू हो गयी। समाजवादी पार्टी इस छापेमारी को राजनीतिक करार दे रही है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या अब सरकार प्रदेश की 22 करोड़ जनता के यहां छापे डालेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं के घरों और उनके प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापेमारी कोई नई बात नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान होने वाली केंद्रीय जांच एजेंसियों की छापेमारी का असर चुनाव पर पड़ता ही है।

विज्ञापन

पिछले कई विधानसभा चुनावों के दौरान पड़े विपक्षी दलों पर छापे

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के नेताओं के घरों प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में भी आयकर विभाग और ईडी ने छापे मारने शुरू किए थे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के यहां भी छापेमारी शुरू हुई थी। 2019 के विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र में एनसीपी नेताओं शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के खिलाफ ईडी ने मामला दर्ज किया था। कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के यहां भी छापेमारी हुई थी।

टाइमिंग और मकसद

राजनीतिक विश्लेषक एम कुमार कहते हैं कि हमें चुनाव से पहले पड़ने वाले छापों को दो नजरियों से देखना चाहिए। पहला टाइमिंग और दूसरा मकसद। वह कहते हैं कि दोनों लिहाज से चुनाव के दौरान पड़ने वाले जांच एजेंसियों के छापे हमेशा सशंकित नजरिए से ही देखे जाते रहे हैं। हालांकि प्रोफेसर कुमार कहते हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की ऐसी छापेमारी सिर्फ भाजपा के समय ही नहीं बल्कि अन्य सत्तारूढ़ दलों की सरकार के वक्त भी होती थी। तो यह चुनावी दौर में छापेमारी की प्रक्रिया बड़ी पुरानी है और इसके मकसद और टाइमिंग पर हमेशा से ही सवाल उठते ही रहे हैं। वह कहते हैं यह बात भी स्पष्ट है कि इन छापों का असर चुनावों पर पड़ता ही पड़ता है। कई बार केंद्र में सत्तारूढ़ दल की राज्य की विपक्षी पार्टियों को इसका माइलेज मिल जाता है तो कई बार नहीं मिल पाता है।।

अखिलेश बोले- एक्सपोज हो रही है भाजपा

वहीं उत्तर प्रदेश में शनिवार को आयकर विभाग के छापों को लेकर सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जाएगा, विपक्षी दलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापों का दौर भी उतना ही बढ़ता जाएगा। कहते हैं ऐसे छापों से उनकी पार्टी बिल्कुल नहीं डरने वाली बल्कि उनका रथ और उनके कार्यक्रम लगातार होते रहेंगे। अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे छापों से भाजपा अब एक्सपोज हो रही है। वह कहते हैं कि अब क्या भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश की 22 करोड़ जनता के यहां भी छापे डालेगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव कहते हैं कि भाजपा को जब हार सताने लगती है तो दिल्ली से बड़े-बड़े नेता आते हैं। अभी उन्होंने इनकम टैक्स विभाग भेजा है धीरे-धीरे ईडी भी आएगी। यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आयकर विभाग को इतनी जानकारी थी तो यह छापेमारी एक महीने पहले भी हो सकती थी, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यह छापेमारी बताती है कि भाजपा पूरी तरीके से हताश और निराश हो चुकी है। सपा मुखिया अखिलेश यादव कहते हैं कि अब उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ-साथ इनकम टैक्स भी चुनाव लड़ने आ गया है क्योंकि भाजपा के पास कोई नया रास्ता नहीं बचा है।

सपा-प्रसपा की टक्कर में भाजपा को मिला था फायदा

उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले एक वरिष्ठ राजनीतिक विशेषज्ञ ने बताया कि लोकसभा के चुनावों में ऐसा देखा गया था जहां पर शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की टक्कर हुई, वहां पर भाजपा के प्रत्याशी चुनाव जीत गए या उंन्हें बढ़त मिली। ऐसे में राजनीतिक नजरिए से दोनों नेताओं का एक होना विपक्षी दलों के लिए थोड़ा ही सही लेकिन चुनावी नुकसान तो कर ही सकता हैं। ऐसे में दबाव की राजनीति ही काम करती है। अखिलेश यादव भी इसी छापेमारी को दबाव की राजनीति करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि संभव है कि अगले कुछ दिनों में और भी छापेमारी हों। वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि सपा सरकार के दौरान हुई कई अनियमितताओं की जांच न सिर्फ सीबीआई बल्कि दूसरी एजेंसियां भी कर रही हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00