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बालाकोट एयर स्ट्राइक करने वाली ग्वालियर एयरबेस को मिल सकती है चीन के खिलाफ बड़ी जिम्मेदारी

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Fri, 19 Jun 2020 12:27 AM IST
Balakot Air Strike Gwalior Airforce may get big task against China
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चीन के साथ बढ़ते तनाव के बाद केंद्र सरकार ने सेना के तीनों अंगों को विशेष रूप से सतर्क कर दिया है। वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए विशेष प्रस्तावों पर काम तेज कर दिया गया है। इस दौरान एयर फोर्स स्टेशन ग्वालियर की भूमिका खास तौर पर बढ़ गई है।

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पुलवामा हमले में थी ग्वालियर एयरबेस की अहम भूमिका

पुलवामा हमले के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक में भी ग्वालियर स्टेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। यहां से 12 मिराज-2000 ने पाकिस्तान की सीमा में घुस कर जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंपों को नेस्तनाबूद कर दिया था। सूत्रों के अनुसार चीन से टकराव की स्थिति में ग्वालियर के वायुवीरों को प्राथमिकता पर एक बार फिर बड़ा टारगेट दिया जा सकता है। एयर फोर्स स्टेशन को एक्शन मोड में रहने के निर्देश मिल चुके हैं।



भारतीय वायु सेना की सेंट्रल कमांड के तहत आने वाले ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन के नाम वीरता के एक से बढ़कर एक अनुभव और उपलब्धियां हैं। इनमें नवीनतम फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर आतंकियों कैंपों का सफाया शामिल है।

ग्वालियर के वायुवीरों को दिया गया था सर्जिकल स्ट्राइक का जिम्मा

पाकिस्तान की सीमा में घुसकर हमला करने का जिम्मा ग्वालियर के वायुवीरों को दिया गया था। जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम दिया। यहां से 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी थी। ये सभी इजरायल निर्मित स्पाइस 2000 बम (लगभग एक हजार किलो का एक बम) से लैस थे। ये फाइटर जेट हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के ऊपर उड़ान भरते हुए एलओसी से लगभग 60 किलोमीटर पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकी कैंपों को तबाह कर सकुशल वापस लौट आए थे।

ये हैं उपलब्ध्यिां

इस दौरान वायु सेना ने निगरानी के लिए इजरायली फाल्कन और स्वदेशी तकनीक नेत्र का भी सदुपयोग किया था। एहतियात के तौर पर सुखोई एसयू 30 विमान भी तैनात किए थे। दुश्मन देश की सीमा में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में ये बड़ी कामयाबी थी। वर्तमान में ग्वालियर बेस की एयर फोर्स 7 स्क्वाड्रन के नाम 1965, 1971 और 1999 कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी रही हैं।

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