लापरवाही: कोरोना का टीका लगवाने के दौरान टूटी सुई, काम नहीं कर रहे युवक के दाएं हाथ-पैर

अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 20 Sep 2021 04:56 PM IST

सार

यूपी के ललितपुर में स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही से एक युवक की जान पर बन आई है। वैक्सीन लगवाने के दौरान युवक के हाथ (बाजू) में सुई टूट गई। दर्द होने पर नौ दिन बाद जब ऑपरेशन किया गया तो उसकी बाजू से सुई का टुकड़ा निकला है। अब युवक के हाथ और पैर ने काम करना बंद कर दिया है। 
जिला अस्पताल में ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज
जिला अस्पताल में ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के ललितपुर के बार ब्लॉक क्षेत्र के बानौनी गांव निवासी युवक का आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही से वैक्सीन लगवाने के दौरान उसके हाथ (बाजू) में सुई टूट गई। असहनीय दर्द होने पर नौ दिन बाद जिला अस्पताल के डॉक्टर ने जब ऑपरेशन किया तो सुई का टुकड़ा निकला। मरीज का दायां हाथ नहीं चलने पर डॉक्टर ने उसे मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया है।
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बानीनी गांव निवासी इंद्रेश अहिरवार (22) पुत्र गोलू ने बताया कि नौ सितंबर को कोविड वैक्सीन गांव में स्थित स्कूल में लगे कैंप में स्वास्थ्यकर्मी से लगवाई थी। वैक्सीन लगने के बाद हाथ में फफौला पड़ने के साथ ही बुखार आ गया। निजी चिकित्सक से उपचार लेने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। उसने बताया कि धीरे-धीरे हाथ सुन्न होने लगा। 


उसने 13 सितंबर को जिला अस्पताल पहुंचा और वरिष्ठ फिजीशियन ड़. पवन सूद ने उसका उपचार किया। राहत न मिलने पर उन्होंने हाथ में फफोले को दबाकर देखा तो उसे कुछ चुभने का अहसास हुआ। इस पर उन्होंने 17 सितंबर को एक्सरे व सीटी स्कैन कराया, जिसकी रिपोर्ट में हाथ में सुई फंसी दिखी। 

इस पर केस सर्जन डॉ. डीके राज को रेफर कर दिया गया। सर्जन डॉ. डीके राज ने 18 सितंबर को ऑपरेशन कर निडिल निकाल दी। करीब एक घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद मरीज को राहत मिली, लेकिन उसका दायां हाथ व पैर काम न कर पाने पर डॉक्टर ने उसे मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। 

ऑपरेशन के दौरान मरीज के दाएं हाथ से इंजेक्शन की सुई निकली है। मरीज का दायां हाथ नहीं चल रहा है। इससे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया है।-डॉ. डीके राज, सर्जन जिला अस्पताल

वैक्सीन की निडिल (सुई) ऑटोकट होती है। जिसे इंजेक्शन में लगाना या निकालना नहीं होता है। यह कप कटर से काटी जाती हैं। ऐसे में निडिल निकलकर शरीर में लगने की संभावना कम है। ऑपरेशन "से निकाली गई निडिल की जांच में पुष्टि होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. जीपी शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
 
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