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कौन देगा इस सवाल का जवाब: तिमाही परीक्षा सिर पर, बिना किताबों के कैसे तैयारी करें छात्र

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी। Published by: झांसी ब्यूरो Updated Thu, 11 Aug 2022 01:30 AM IST
सार

परिषद की नाकामी के चलते स्कूलों में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें अब तक मुहैया नहीं हुई हैं। अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के चार माह पूरे होने को हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

परिषदीय स्कूलों में तिमाही परीक्षा का समय आ गया है। लेकिन अब तक स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में कई बच्चे बिना किताबों के ही पढ़ रहे हैं। गत सत्र में भी पाठ्यपुस्तकें दीपावली के बाद ही स्कूलों में पहुंचाई गई थीं।



बेसिक शिक्षा परिषद के संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की जाती हैं। जिसके लिए परिषद द्वारा छपाई और स्कूल तक पहुंचाने के लिए ढुलाई का ऑर्डर दिया जाता है। लेकिन परिषदीय स्कूलों में किताबें कभी भी समय से नहीं पहुंच पाती हैं। स्कूलाें में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्कूलों में शत् प्रतिशत उपस्थिति के लिए स्कूल चलो अभियान के तहत प्रयास कराया गया। जिससे प्रदेश में लगभग तीस हजार से अधिक नए विद्यार्थियों ने परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष प्रवेश लिया। लेकिन परिषद की नाकामी के चलते स्कूलों में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें अब तक मुहैया नहीं हुई हैं। अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के चार माह पूरे होने को हैं। लेकिन अभी भी 40 प्रतिशत विद्यार्थी बिना किताबों के ही स्कूलों में पढ़ रहे हैं।


तिमाही परीक्षा अगस्त के तीसरे और चौथे सप्ताह से प्रारंभ हो सकते हैं। लेकिन बच्चों के पास किताबें ही नहीं हैं, ऐसे में बच्चा अपनी पढ़ाई किस तरह से पूरी करेगा।

गत सत्र भी किताबों के देरी से पहुंचने के कारण विद्यार्थी आधा से ज्यादा सत्र बिना किताबों के ही पढ़ते रहे थे। वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों के लिए निपुण लक्ष्य तय किया गया है। जिसमें कक्षा और आयुवर्ग के अनुसार विद्यार्थियों के ज्ञान का स्तर परखा जाएगा। लगभग पंद्रह दिन पहले जिले में 54 हजार किताबें पहुंचाई जा चुकी हैं। जिनके सत्यापन का कार्य चल रहा है।

स्कूल चलो अभियान के तहत स्कूलों में नामांकन तो बढ़ गए लेकिन किताबें पर्याप्त नहीं हैं। - रचना तिवारी, प्रधानाध्यापिका, प्रा. वि. ढ़िमरपुरा
पिछले साल के बच्चों से किताबें मांगी थी, लेकिन सभी बच्चों के पास अभी किताबें नहीं हैं। - अरुणा देवी, शिक्षिका, प्रा. वि. बड़ागांव
तिमाही परीक्षा का समय आने वाला है, बच्चे बिना किताबें पढ़ाई किस तरह पूरी करेंगी। - भावना वर्मा, शिक्षिका
पिछले सत्र में भी किताबें देरी से ही मिली थी, यहां तक कि वर्कबुक तो स्कूलों तक पहुंची ही नहीं थी। - वंदना वर्मा, शिक्षिका, उ.प्रा.वि. केशवपुर
नामांकन बढ़ने से पिछले साल के बच्चों की किताबें हर बच्चे को नहीं मिल पाई। - प्रतिमा कुशवाहा, कंपोजिट विद्यालय, पालर

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