कुरसौली में बुखार से 10 मौतें: गली-गली घूमे डीएम, पीड़ितों का हाल पूछा, ग्रामीण बोले- और पहले आते तो हर घर में मातम...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 17 Sep 2021 12:16 AM IST

सार

डीएम के आने की खबर सुनकर 10 दिन से बुखार से पीड़ित रही दिव्या तिवारी ने रोते हुए कहा कि आप लोग पहले आ गए होते तो गांव के हर घर में मातम न पसरा होता।
बीमार चंद्रशेखर तिवारी का हाल पूछने पहुंचे डीएम
बीमार चंद्रशेखर तिवारी का हाल पूछने पहुंचे डीएम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कानपुर के कुरसौली में रहस्यमयी बुखार से एक के बाद एक लगातार 10 मौतों की खबरें अखबारों में पढ़ने के बाद आखिरकार आला अफसरों की नींद टूटी। दोपहर में सीडीओ और सीएमओ के गांव पहुंचने के बाद रात पौने 11 बजे डीएम आलोक तिवारी और एडीएम सिटी अतुल कुमार भी गांव गए।
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उन्होंने गांव की गलियों में घूमकर लोगों के पलायन का सच जाना। घरों में बीमार पड़े लोगों का हालचाल पूछा। सफाई और रात में मच्छरों के आतंक की स्थिति समझी। गलियों में घूमते हुए वे सबसे पहले आशीष तिवारी के घर पहुंचे। 10 सितंबर को आशीष की पत्नी क्षमा और 14 को मां निर्मला की मृत्यु बीमारी से हो चुकी है।


इनके पिता चंद्रशेखर तिवारी की हालत भी गंभीर है। वे घर पर ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे पड़े मिले तो तत्काल उन्हें हैलट शिफ्ट करने का आदेश दिया। डीएम के आने की खबर सुनकर 10 दिन से बुखार से पीड़ित रही दिव्या तिवारी ने रोते हुए कहा कि आप लोग पहले आ गए होते तो गांव के हर घर में मातम न पसरा होता।

हालांकि दिव्या ने डीएम और सीएमओ समेत तमाम अफसरों से कहा कि वे लौट जाएं नहीं तो वे भी बीमार पड़ सकते हैं। गांव की हवा में जहर घुल चुका है। इस पर डीएम ने सभी को दिलासा दी। बोले-लापरवाह लोगों पर कार्रवाई होगी। 

सूचना छिपाई तो हत्या का मुकदमा दर्ज होगा 
गांव वालों के मुंह से अफसरों का सच सुनने के बाद डीएम तमतमा गए। पंचायत सचिव और लेखपाल गांव में होने वाली मौतों की जानकारी छिपाएंगे नहीं। सही समय पर सूचना नहीं आई तो उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सीएमओ से कहा कि उनकी टीम लगातार गांव में रहेगी। जो लोग दवा लेने नहीं आ सकते उन्हें घर तक दवा पहुंचाई जाएगी। उन्होंने बताया कि रात में आने का मकसद यह देखना था कि गांव में मच्छरों की स्थिति क्या है। लोग मच्छरदानी का इस्तेमाल करते हैं या नहीं। 
 

पांच घंटे हाथ में टांगे रहे ग्लूकोज बोतल, फिर रोगी लेकर भागे
कुरसौली वालों ने अधिकारियों को सरकारी चिकित्सीय व्यवस्था का आइना दिखा दिया। गुरुवार को सीडीओ के साथ कुरसौली पहुंचे सीएमओ ने जब मिलन प्रजापति से पूछा कि उसने अपनी पत्नी कीर्ति को हैलट या उर्सला में भर्ती क्यों नहीं कराया? इस पर बताया कि 31 अगस्त को मामी लक्ष्मी प्रजापति को वे शाम छह बजे हैलट लेकर गए।

रोगी को इमरजेंसी बेड पर लिटा दिया गया। ग्लूकोज की बोतल लगी लेकिन रात 11 बजे तक बेड नहीं मिला। हालत बिगड़ी तो कुलवंती लेकर भागे लेकिन पहुंचने के पहले ही मौत हो गई। मिलन ने यह भी बताया कि हैलट इमरजेंसी में वीगो लगाने के बाद बोतल उनके हाथ में पकड़ा दी गई।

वे और रिश्तेदार पांच घंटे तक हाथ में ही बोतल पकड़े रहे। मिलन ने कहा कि इसी वजह से साहब पत्नी को किसी सरकारी अस्पताल लेकर नहीं गया। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह यह सुनकर चुुप हो गए। गांव की तन्नू (14) के साथ भी यही हुआ था। चार घंटे बाद भी बेड नहीं मिला तो परिजन निजी अस्पताल भागे। उसकी भी अस्पताल पहुंचने के पहले मौत हो गई थी।
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