ये हैं कानपुर के 5 रहस्यमयी स्थान

गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 30 May 2017 08:59 AM IST

सार

 भूत, खजाना, डायन, चुड़ैल, आत्मा
कानपुर के पांच रहस्य
कानपुर के पांच रहस्य
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विस्तार

मेट्रो सिटी बनने को ओर तेजी कदम बढ़ा रहा कानपुर महानगर कई रहस्यों को समेटे हुए है। यहां आज भी भूत-प्रेत, डायन, चुड़ैल, आत्मा, खजाना जैसी चर्चाओं के बाजार हमेशा गर्म रहते हैं। हम आपको बताते हैं कानपुर के ऐसे ही 5 अनसुलझे रहस्य और जगहों के बारे में जिन्हें जानकार आप भी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे...
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1. अनवरगंज का बंगला नंबर 128

कानपुर के रहस्य
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अनवरगंज के प्राइमरी स्कूल का बंगला नंबर 128 कमरा जहां जाने से बच्चे डरते हैं। तीन साल के अंदर स्कूल के बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई कि टीचरों का ट्रांसफर करना पड़ा। नौबत तो ये है कि यहां अब दिन में उंगलियों में गिनने वाली संख्या में बच्चे आते हैं रात होते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है। स्कूल की टीचर रजनी गुप्ता का कहना है कि कुछ साल पहले स्कूल के एक कर्मचारी की पत्नी ने क्लास रूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसे बाद स्कूल के कुछ बच्चे बीमार पढ़ गए। साथ ही स्कूल के अंदर ही एक छात्र की मौत भी हो गई थी। फिर ऐसी अफवाह फैली की महिला की आत्मा स्कूल के कमरे में रहती है और इसी के चलते अभिवावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। पियून रमेश ने कहना है कि कुछ बच्चों ने किसी औरत को कुर्सी पर बैठे हुए भी देखा है।

2. गंगा बैराज में डायन

कानपुर के रहस्य
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कानपुर के नवागंज में बने गंगा बैराज में एक डायन का वीडियो बनाने का दावा सोशल मीडिया पर किया गया है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने इस वीडियो को देखा और शेयर भी किया है। वीडियो बनाने वाले ने लिखा है कि गंगा बैराज में रात 2 बजते ही आत्माओं का जमावड़ा लग जाता है। वहां रात में कोई भी जाता है तो डर के ही वापस लौटता है। आसपास रहने वालों ने भी ये अनुभव किया है कि कोई अदृश्य शक्ति उन्हें परेशान करती है। 
 

गंगा नदी बांध के पास वास्तविक डायन ..29 जनवरी कानपुर

https://www.youtube.com/watch?v=8rspF-vKDtg

3. सिविल लाइंस ग्रेव यार्ड

कानपुर का रहस्य
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कानपुर के पौश इलाके सिविल लाइंस में बने ग्रेव यार्ड को आत्माओं का बसेरा कहा गया है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि रात में यहां से गुजरने वाले हर शख्स को भूत दिखता है। इसी वजह से यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सिविल लाइंस में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने एक अंग्रेज की आत्मा को देर रात 2 बजे सड़क पर घूमते हुए देखा है। अंग्रेज सफेद रंग की पोशाक पहने हुए रहता है टोकने पर वह गायब हो जाता है। 

4. खेरेश्वरधाम मन्दिर में अश्वत्थामा की आत्मा

कानपुर के रहस्य
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खेरेश्वरधाम मन्दिर कानपुर से 40 किलोमीटर दूर शिवराजपुर में गंगा नदी से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित है। महाभारत काल से सम्बन्धित इस मन्दिर के शिवलिंग पर केवल गंगा जल ही चढ़ता है। मान्यता है कि मन्दिर को गुरु द्रोणाचार्य जी द्वारा बनवाया गया था और यहीं उनके पुत्र अश्वत्थामा का जन्म भी हुआ था। कहते हैं कि मन्दिर में रोजाना रात्रि में 12 से 1 बजे के बीच द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा पूजा करने के लिए आते हैं। मन्दिर के पुजारी गोस्वामी के अनुसार रात्रि में मन्दिर बंद होने के बाद जब सुबह 4 बजे मन्दिर के पट खुलते हैं तो यहां स्थित मुख्य शिवलिंग पर जो सफेद फूल रखे जाते हैं, उनमें से एक फूल का रंग बदल कर लाल हो जाता है।

5. दबा खजाना

कानपुर का रहस्य
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वैसे तो कानपुर में कई जगहों पर खजाना मिलने की खबरें सामने आई हैं। लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जहां आज भी खुदाई के दौरान पुराने जमाने के सिक्के यहां मिला करते हैं। औनाहा, बिनौर, सचेंडी, शखरेज रावतपुर, काकादेव, पुखरायां, मूसानगर, शिवराजपुर, सचेंडी, जाजमऊटीला, बिठूर पेशवा महल, रमईपुर जैसे स्थानों पर भी खजाना होने की बात इतिहास के जानकारों ने कही है। इन इलाकों में रहने वाले पुराने लोग भी यही बात कहते हैं। क्राइस्टचर्च कॉलेज के हिस्ट्री प्रोफेसर डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि कानपुर ऐतिहासिक नगरी है। यहां खजाना दबे होने की बात तो आम है। बिठूर में नाना साहब के महल में एक कुआं था। जब ब्रिटिश हुकूमत ने बिठूर पर कब्जा किया तो किले से करीब 30 लाख रुपए कैश और 70 लाख रुपए की ज्वैलरी मिली थी। लोगों का दावा है कि असली खजाना तो अभी भी किले में ही दबा हुआ है। हाल ही में नानामऊ गांव निवासी तिलक सिंह अपने घर के सामने कमरा बनवाने के लिए नींव खोद रहे थे, तभी कुछ सिक्के निकल आए। प्रधान ने बताया कि सिक्कों पर फारसी में कुछ लिखा है। सराफ ने जांच करके तांबे की धातु के सिक्के बताया। जानकारों ने बताया कि सिक्के सन 1270 के हैं और गुलाम वंश का शासन दिखाया गया है। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। कई सिक्के ग्रामीण लेकर अपने घर चले गए।  
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भीतरगांव, निंबियाखेड़ा, रार और, भरतपुर में पहले ही मिल चुके हैं हजारों सोने के  सिक्के


 
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5 अनसुलझे रहस्य और जगह

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