शासन ने डीएम से ली असलहा लाइसेंस फर्जीवाड़े की जानकारी, सौपी जा सकती है किसी एजेंसी को जांच

यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 27 Aug 2019 02:05 AM IST
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शासन ने जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत से फर्जी असलहा लाइसेंस फर्जीवाड़े की जानकारी ली है। इतने बड़े फर्जीवाड़े से प्रदेश सरकार की छवि खराब हो रही है। इसलिए किसी एजेंसी को जांच दिए जाने की संभावना है।
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अमर उजाला ने एक अगस्त को शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसके बाद जांच में फर्जीवाड़ा करके 90 शस्त्र लाइसेंस जारी करने की बात सामने आई। एक बाबू और एक कारीगर (प्राइवेट कर्मचारी) के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।


दो बाबुओं को निलंबित किया गया है। मामला शासन तक पहुंच गया है। शासन ने जिलाधिकारी को फोन कर मामले की जानकारी ली है। जिलाधिकारी ने फर्जीवाड़े और अब तक की गई कार्रवाई के बारे में शासन को अवगत कराया है।

 

बिना वेतन की नौकरी से दो प्लॉट, एक दुकान

शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े में शामिल कारीगर (प्राइवेट कर्मचारी) जितेंद्र को लिखापढ़ी में असलहा विभाग से कभी कोई पगार या मानदेय नहीं मिला। प्रशासन स्तर से कराई गई अनौपचारिक संपत्ति की जांच में शहर में उसके दो प्लाट होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि वह एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान का मालिक भी है।

जितेंद्र असलहा विभाग में पांच साल से काम कर रहा था। उसे एक बाबू ने अपनी मदद के लिए रखा था। तभी से बाबू तो बदलते रहे लेकिन यह कारीगर नहीं बदला। असलहा जैसे संवेदनशील विभाग की फाइलें और अन्य कागजात इसकी पहुंच में रहते थे।

 

कारीगर जितेंद्र को लिखापढ़ी में पगार नहीं, पर कई संपत्तियों का मालिक

उसे लिखापढ़ी में कोई वेतन या मानदेय नहीं मिलता था। एक प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटर को रायफल क्लब की मद से मानदेय दिया जाता है। कारीगर को कोई वेतन या मानदेय न मिलने के बावजूद वह लाखों की संपत्ति का मालिक है।

बताया गया कि कल्याणपुर थाने से गूबा गार्डेन निवासी एक व्यक्ति के नाम जारी फर्जी लाइसेंस की जांच में 29 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में उसने इस लाइसेंस को जारी करने के लिए 30 हजार रुपये लेने की बात कबूली थी।

 

सिटी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कबूली थी रिश्वत लेने की बात

उसके घूस लेने की पुष्टि करने के बावजूद अफसरों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस कारण वह आराम से फरार हो गया। किसी भी अफसर ने संवेदनशील विभाग में प्राइवेट कर्मचारी के बिना मानदेय या वेतन के काम करने पर ध्यान नहीं दिया। अफसर मानते रहे कि उसे काम करने के बदले लोगों से अच्छीखासी रकम मिल जाती है। इसलिए वह मुफ्त में काम करता है।

पुलिस ने भाई को उठाया
जानकारी मिली है कि फरार चल रहे कारीगर पर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने उसके भाई को उठा लिया है। रविवार रात से ही पुलिस उसकी तलाश में रिश्तेदारों के घर दबिश दे रही है। कुछ मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लेने के बाद पुलिस को उसकी लोकेशन के बारे में सटीक जानकारी मिल गई है। जल्द उसकी गिरफ्तारी हो सकती है।
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