बाबू गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान पहचान खोने के कगार पर

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 10:50 PM IST
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कभी एशिया स्तर पर थी पहचान, अब वजूद पर संकट
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पूर्वमंत्री गेंदा सिंह के प्रयास से हुई थी अनुसंधान केंद्र की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। सेवरही का बाबू गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान उपेक्षा के कारण अपनी गौरवशाली पहचान को खोने के कगार पर पहुंच गया है। क्योंकि संसाधनों की कमी के चलते संस्थान से वैज्ञानिक पलायन कर रहे हैं।
बाबू गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान सेवरही की स्थापना वर्ष 1975-1976 में हुई थी, जिसकी पहचान एशिया स्तर की थी। गन्ना किसानों के लिए वरदान साबित होने वाला संस्थान स्थापना काल के बाद लगभग एक दशक तक शाहजहांपुर से संबद्ध रहा था। इसका संचालन वहीं से होता था, लेकिन 1987-1988 में प्रदेश सरकार ने इस संस्थान में निदेशक के पद का सृजन कर दिया और संस्थान के पहले निदेशक बने डॉ. एचएन सिंह की देखरेख में यह संस्थान तरक्की की राह पकड़ लिया था। यही नहीं इस संस्थान के विकास के लिए सरकार की तरफ से अलग से बजट की व्यवस्था भी कर दी गई थी। पूर्वांचल के गन्ना शोध केंद्र गोरखपुर, लक्ष्मीपुर, कटेया, सादात, गाजीपुर, कुशीनगर, सुल्तानपुर, अमहट, घाघरा घाट और बहराइच आदि केंद्रों को भी इसी संस्थान से संबद्ध कर दिया गया था। इस दौरान काफी कम समय में इस संस्थान ने गन्ने की कई अच्छी व उन्नत प्रजातियों को विकसित कर देश में ही नहीं, बल्कि एशिया में अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर लिया। लेकिन वर्ष 1997 में इस संस्थान के निदेशक का तबादला कर दिया गया। लगभग दो साल तक निदेशक का पद रिक्त रहा और 1997 में तत्कालीन यूपी सरकार ने निदेशक पद को समाप्त करने के साथ इसे पुन: शाहजहांपुर से संबद्ध कर दिया। उसके बाद से संस्थान के सितारे गर्दिश में चले गए और तभी से संस्थान की दुर्दशा शुरू हुई। इसका परिणाम हुआ कि यहां से वैज्ञानिकों का पलायन होने लगा। संस्थान से निदेशक का पद समाप्त होने के बाद यहां दो संयुक्त निदेशक, एक अपर निदेशक के साथ आठ वरिष्ठ वैज्ञानिकों, 32 सहायक वैज्ञानिकों और 25 सुपरवाइजर व टेक्निशियनों को मिलाकर कुल 174 पद सृजित थे। लेकिन उनकी संख्या आज नगण्य है। इस क्षेत्र के गन्ना किसान सुरेंद्र राय, मथुरा सिंह, परमेंद्र जायसवाल, बासुदेव रौनियार, दारा सिंह यादव, अशोक सिंह, संजय सिंह आदि का कहना है कि जब तक यहां निदेशक नहीं रहेंगे, तब तक सितारे गर्दिश में ही रहेंगे।

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