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Kushinagar News: वाहनों का फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, कई दिनों से थी तलाश

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 24 Aug 2022 10:27 AM IST
सार

एसपी ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी विभिन्न प्रदेशों की परिवहन विभाग की वेबसाइट से लोगों और वाटरमार्क डाउनलोड करते थे। उसे कोरल ड्रा नामक साफ्टवेयर के माध्यम से सरकार से निर्धारित डीएल आरसी के फॉर्मेट पर एडिट करते थे, जिसका ऑनलाइन क्यूआर कोड जनरेट करके उसका दुरुपयोग करते थे।

फर्जी तरीके से कागजात तैयार करने के तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देते एसपी धवल ज
फर्जी तरीके से कागजात तैयार करने के तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देते एसपी धवल ज - फोटो : KUSHINAGAR
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विस्तार

कुशीनगर जिले में फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों का पंजीकरण प्रमाणपत्र सहित अन्य सरकारी कागजात बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।



मंगलवार को पुलिस लाइंस में एसपी धवल जायसवाल ने कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर सेल, तरयासुजान और तमकुहीराज थाने की पुलिस की टीम ने फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस, वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र बनाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


इनकी पहचान रफीक अहमद निवासी तिलंगवापट्टी बांसगांव थाना विशुनपुरा, अनिल सिहं पटेल, राजा पटेल उर्फ अभिषेक निवासी परसौनी बुजुर्ग कौव्वापट्टी, थाना तमकुहीराज के रूप में हुई है। इनके पास से 60 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस (स्मार्ट कार्ड), 15 आरसी, 426 पीवीसी स्मार्ट कार्ड चिप सहित, 174 पीवीसी स्मार्ट कार्ड, 28 सरकारी मोहर, सात मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, चार प्रिंटर और स्कैनर, तीन पेनड्राइव, 23 मोहर हस्ताक्षर सहित प्रिंटेड, 50 हजार नकदी सहित अन्य सामान बरामद हुआ।

एसपी ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी विभिन्न प्रदेशों की परिवहन विभाग की वेबसाइट से लोगों और वाटरमार्क डाउनलोड करते थे। उसे कोरल ड्रा नामक साफ्टवेयर के माध्यम से सरकार से निर्धारित डीएल आरसी के फॉर्मेट पर एडिट करते थे, जिसका ऑनलाइन क्यूआर कोड जनरेट करके उसका दुरुपयोग करते थे। उसके बाद फर्जी तरीके से गाड़ियों की नंबर प्लेट बना लेते थे, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करने पर आनलाइन शो करता था।

इन नंबरों का इस्तेमाल चोरी की गाड़ियों को बेचने में होता था। इसके अलावा तीनों शातिर फर्जी तरीके से आर्मी मूवमेंट ऑर्डर संबंधित कागजात तैयार करके वाहन मालिकों को दे देते थे। इससे किसी भी चेक पोस्ट पर गाड़ी नहीं रोकी जाती थी। क्यूआर कोड स्कैन करके जालसाजों का गिरोह ऑल इंडिया परमिट, फिटनेस इत्यादि भी तैयार करता था।
 

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