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Maharajganj News: आशा कार्यकर्ताओं ने धरना देकर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की
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कलक्ट्रेट परिसर में धरना देती आशा कार्यकर्ता।
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मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, 21,500 रुपये मासिक मानदेय की मांग की
महराजगंज। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जिले की आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता एसोसिएशन के बैनर तले आशाओं ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष जमीरून निशा ने कहा कि प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों को कार्य करते हुए दो दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी उन्हें अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल सकी है। स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका रहती है। गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल, नियमित टीकाकरण और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के सफल संचालन में उनका योगदान सबसे अहम है।
जमीरून निशा ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी आशा बहनों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही सम्मानजनक मानदेय। उन्होंने कहा कि वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं में असंतोष है।
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मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने 21,500 रुपये मासिक निश्चित मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा, 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, मृत्यु की स्थिति में आश्रित को नौकरी, आभा कार्ड एवं सी-बैंक की बकाया धनराशि का भुगतान, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का कार्यभार पुनः सौंपने, सभी लंबित मदों का भुगतान तथा फाइव-जी मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की है। धरना-प्रदर्शन में नीलम शर्मा, राधिका, नीतू, दुर्गावती, ममता, संगीता, कुसमावती, नीलम, संजू, विंद्रवती सहित आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
महराजगंज। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जिले की आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता एसोसिएशन के बैनर तले आशाओं ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष जमीरून निशा ने कहा कि प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों को कार्य करते हुए दो दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी उन्हें अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल सकी है। स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका रहती है। गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल, नियमित टीकाकरण और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के सफल संचालन में उनका योगदान सबसे अहम है।
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जमीरून निशा ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी आशा बहनों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही सम्मानजनक मानदेय। उन्होंने कहा कि वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं में असंतोष है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने 21,500 रुपये मासिक निश्चित मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा, 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, मृत्यु की स्थिति में आश्रित को नौकरी, आभा कार्ड एवं सी-बैंक की बकाया धनराशि का भुगतान, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का कार्यभार पुनः सौंपने, सभी लंबित मदों का भुगतान तथा फाइव-जी मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की है। धरना-प्रदर्शन में नीलम शर्मा, राधिका, नीतू, दुर्गावती, ममता, संगीता, कुसमावती, नीलम, संजू, विंद्रवती सहित आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।