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दर्द से तड़पते मरीजों केा भी इमरजेंसी में तत्काल नहीं मिल पाता इलाज

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 11:39 PM IST
जिला अस्पताल में इमरजेंसी में भर्ती मरीज को देखता तीमारदार।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी में भर्ती मरीज को देखता तीमारदार। - फोटो : MAHARAJGANJ
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दर्द से तड़पते मरीजों केा भी इमरजेंसी में तत्काल नहीं मिल पाता इलाज
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महराजगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सेवा मरीजों को तत्काल नहीं मिल पाती है। इंतजार के बाद ही इलाज होता है। इससे दर्द से कराहते मरीजों को काफी परेशानी होती है। सोमवार को जिला अस्पताल, सीएचसी निचलौल, परतावल, मिठौरा की पड़ताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा की पोल खुलकर सामने आ गई। कहीं डॉक्टर मौके पर नहीं मिले तो कहीं वार्ड खाली मिला।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल, समय सुबह 9:39 बजे
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक से लेकर वार्ड व्वाय तक सभी जिम्मेदार इमरजेंसी कक्ष में नहीं दिखे। इमरजेंसी वार्ड में निचलौल निवासी उपेंद्र ने अपने पिता जगमोहन को गंभीर हालत में भर्ती कराया। उपेंद्र ने बताया कि पिता को तेज बुखार के साथ झटका सहित अन्य बीमारियां हैं। इलाज के लिए अस्पताल लाया तो इमरजेंसी में तैनात जिम्मेदारों ने बीमार पिता को बगैर चद्दर बिछाए ही बेड पर लिटा दिया। जिसके बाद घर से बिस्तर लाकर इमरजेंसी वार्ड में पिता का इलाज के लिए चिकित्सक का इंतजार कर रहा हूं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल, सुबह 10:20 बजे
इमरजेंसी में डॉ. नीरज कन्नौजिया कक्ष में मौजूद मिले। फार्मासिस्ट शशिविन्द मिश्रा व विनोद कुमार सिंह इमरजेंसी वार्ड में काम निपटा रहे थे। उनके साथ वार्ड ब्वाय प्रभुनाथ प्रसाद जरूरी काम करते दिखे। स्वीपर अवधराज शौचालय की सफाई करते मिले। धनगड़ा निवासी कंचन (21) पेट में दर्द और उल्टी की समस्या होने पर अस्पताल पहुंची। दर्द से कराहते हुए वह इमरजेंसी वार्ड पहुंची, जहां कुछ देर में उनका इलाज शुरू हो गया।
जिला अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड, सुबह 11 बजे
इमरजेंसी वार्ड में अपने कक्ष में डॉक्टर एवं स्टाफ आपस में बात कर रहे थे। कांशीराम आवास से भानमति अपना इलाज कराने आईं थी। उनको ड्रिप चढ़ाया जा रहा था। ग्लूकोज की बोतल दीवार पर लगी एक कील में लटकी हुई थी। ग्लूकोज की बोतल लटकाने के लिए स्टैंड नहीं था। भर्ती होने वाला पर्चा मरीज के ऊपर पड़ा था। उसे हटाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। वहीं बगल में एक किनारे विश्वनाथपुर पडवनिया गांव के पप्पू दर्द से कराह रहे थे। उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। उनको गले में कुछ परेशान हुई, तो गांव के चन्द्रेश सुबह 9 बजे जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन एक घंटे तक कोई उपचार नहीं मिला। चन्द्रेश ने बताया कि एक इंजेक्शन लगाया गया है। अभी कुछ आराम नहीं मिला है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठौरा दोपहर: 12 बजे
यहां कोई मरीज इमरजेंसी वार्ड में भर्ती नहीं मिला। कमरे में गंदगी थी। इमरजेंसी वार्ड में एक ऑक्सीजन सिलिंडर रखा गया था। कमरे में बिजली सुचारू रूप से संचालित मिली। प्रभारी अधीक्षक डॉ. विपिन कुमार शुक्ला ने बताया कि नियमित सफाई कराई जाती है। मरीजों के आने पर त्वरित इलाज की सुविधा है।
जिले के सभी अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड में त्वरित इलाज की सुविधा दी जाती है। मौके पर उपस्थित स्टाफ तुरंत इलाज में जुट जाते हैं। अगर कहीं लापरवाही हो रही है, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ

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