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महोबा कांड: फरार आईपीएस मामले में विजिलेंस टीम ने दर्ज किए बयान, आडियो व वीडियो की सीडी ले गई टीम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 28 Aug 2021 12:08 PM IST

सार

कानपुर के एसपी विजिलेंस पीराम व निरीक्षक धनंजय वर्मा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम शुक्रवार को महोबा पहुंची। टीम ने पूछा कि निलंबित एसपी मणिलाल किस तरह कारोबारियों से वसूली करते थे।
इंद्रकांत त्रिपाठी (मृतक कारोबारी) आईपीएस मणिलाल पाटीदार
इंद्रकांत त्रिपाठी (मृतक कारोबारी) आईपीएस मणिलाल पाटीदार - फोटो : amar ujala
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विस्तार

महोबा में क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत और भ्रष्टाचार के मामले में फरार चल रहे एक लाख के इनामी निलंबित आईपीएस मणिलाल पाटीदार को पुलिस 11 माह बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के ट्रांसपोर्टर द्वारा दर्ज कराए गए भ्रष्टाचार मामले में विजिलेंस टीम ने महोबा आकर वादी व पांच अन्य लोगों से पूछताछ कर कलम बंद बयान दर्ज किए हैं।
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टीम वादी से इंद्रकांत द्वारा सोशल मीडिया में वायरल किए गए वीडियो भी ले गई। कानपुर के एसपी विजिलेंस पीराम व निरीक्षक धनंजय वर्मा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम शुक्रवार को महोबा पहुंची। टीम ने कचहरी स्थित पुस्तकालय भवन में सात घंटे तक इंद्रकांत मामले के वादी रविकांत त्रिपाठी, पार्टनर बाल किशोर द्विवेदी, पुरुषोत्तम सोनी, मुनीम दीपेन्द्र सिंह व विस्फोटक कारोबारी केशव सविता के बयान दर्ज किए हैं।


टीम ने पूछा कि निलंबित एसपी मणिलाल किस तरह कारोबारियों से वसूली करते थे। इस दौरान टीम ने सात सितंबर 2020 को इंद्रकांत त्रिपाठी द्वारा सोशल मीडिया में छह लाख रुपये की रिश्वत मांगे जाने के वायरल किए गए आडियो व वीडियो की सीडी भी कब्जे में ली। 

बयान देकर लौटे वादी व अन्य लोगों ने बताया कि विजिलेंस टीम ने उनसे पूरे घटना क्रम की जानकारी लेने के बाद निलंबित एसपी मणिलाल, बर्खास्त दरोगा देवेन्द्र शुक्ला व सिपाही अरुण यादव के भ्रष्टाचार में शामिल होने और किस तरह व्यापारियों पर दबाव बनाने की बात पूछी।

यह था मामला
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के ट्रांसपोर्टर पीपी पांडेय ने 10 सितंबर 2020 को शहर कोतवाली में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि तत्कालीन एसपी मणि लाल पाटीदार ने खरेला व खन्ना पुलिस से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में लगे ट्रकों से वसूली कराई।

प्रति ट्रक दो लाख रुपये की मांग की जाती थी ना दिए जाने पर ट्रकों को सीज किया जाता था। इस मामले के बाद इंद्रकांत त्रिपाठी ने तत्कालीन एसपी पर छह लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया में वीडियो वायरल किया था।

8 सितंबर को उनके गले में गोली लग गई थी और 13 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में मणिलाल पाटीदार समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला कबरई थाने में दर्ज किया गया था।
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