दो सगी बहनों को जिंदा जलाकर मारने में सात को उम्र कैद

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 01:14 AM IST
Seven get life imprisonment for burning alive two real sisters
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मुरादाबाद। ग्यारह साल पहले वाल्मीकि समाज की दो सगी बहनों पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगाकर मारने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (पीए) संध्या चौधरी ने सात आरोपियों को घटना का दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को एक लाख सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
विज्ञापन

2010 में अंजाम दी गई इस वारदात के मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (पी.ए) संध्या चौधरी की अदालत में चल रही थी। दोनों पक्षों ने बहस के दौरान अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि घटना का कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है।

उन्हें झूठा फंसाया गया है। वहीं विशेष लोक अभियोजक आनंदपाल सिंह ने अदालत को बताया कि मुकदमे के आरोपियों ने ही घटना को अंजाम दिया है। जिनके खिलाफ 19 गवाहों ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर इनके खिलाफ बयान दर्ज कराए हैं। जिन्होंने स्पष्ट कहा है कि इन्हीं लोगों ने घटना को अंजाम दिया है।
अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को घटना का दोषी करार देते हुए सतीश मदान, सागर भंडूला, विनोद कक्कड़, बंटी मलिक, सोनिया कोहली, आशा सचदेवा व अमरजीत कौर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर एक लाख सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
दस दिन में दहल गया था कोठीवाल नगर, 11 साल बाद परिवार को मिला इंसाफ
दिसंबर 2010 का महीना शायद ही कोठीवाल नगर के निवासी भूल सकें। नौ दिसंबर से 18 दिसंबर के बीच महज दस दिनों में कोठीवाल नगर दो-दो दोहरे हत्याकांड़ों से दहल उठा था। 11 साल बाद अदालत का फैसला आया तो एक परिवार को इंसाफ मिला।
नौ दिसंबर 2010 को कोतवाली क्षेत्र के कोठीवाल नगर निवासी कपड़ा व्यापारी पंकज गगनेजा के घर में घुसकर उनकी पत्नी और दस साल की बेटी सान्या की लूट के बाद हत्या कर दी गई थी। इससे पूरा क्षेत्र दहल उठा था। व्यापारी वर्ग सड़कों पर था। कई दिनों तक पुलिस प्रशासन को लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा था। इस मामले में वाल्मीकि समाज के दो लोगों राजेश और राकेश के खिलाफ पंकज गगनेजा की ओर से लूट व हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। राजेश को पुलिस ने वारदात वाले दिन ही पकड़ लिया था। लेकिन घटना का मुख्य अभियुक्त राकेश फरार था। दस दिन तक भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं सकी थी। इस बीच 18 दिसंबर को आरोपियों के घर पर भीड़ ने चढ़ाई कर दी थी।
आरोपियों की दो सगी बहनें गीता और नीतू के जले शव घर के कमरे में मिले थे। मां राजो वाल्मीकि की तहरीर पर पंकज गगनेजा समेत 10 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना में पंकज गगनेजा और अन्य कई आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला था। विवेचना के दौरान सतीश मदान, सागर भंडूला, विनोद कक्कड़, बंटी मलिक, सोनिया कोहली, आशा सचदेवा व अमरजीत कौर के नाम घटना में सामने आए। बाद में पुलिस की ओर से अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसमें सभी दोषियों के नाम आरोपियों के तौर पर शामिल थे। अदालत में 19 गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ गवाही देते हुए उन्हें वारदात को अंजाम देने वाला बताया।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00