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गोष्ठी में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में दी गई जानकारी

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 12:01 AM IST
गांव उदना में कृषि गोष्ठी में जानकारी देते वैज्ञानिक
गांव उदना में कृषि गोष्ठी में जानकारी देते वैज्ञानिक - फोटो : POWAYAN
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पुवायां। कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत हैंड ऑन ट्रेनिंग के तहत गांव उदना में गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान किसानों को फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर एनसी त्रिपाठी ने गोष्ठी में किसानों को बताया कि फसल जलाने से होने वाले नुकसानों को देखते हुए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पराली जलाने से दमा के मरीजों को भी दिक्कत होती है। पराली में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा होती है। इस कारण इसे जलाने से नुकसान होता है। फसल अवशेष को बायो डिकंपोजर दवा से खेत में ही सड़ा सकते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।

गोष्ठी में डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि गन्ने के साथ दलहन और तिलहन की भी फसल करनी चाहिए। सहफसली से किसानों को ज्यादा आय होगी। आय बढ़ाने के लिए किसानों को मधुमक्खी पालन भी करना चाहिए। बाजार में दवा आदि के लिए शहद की भारी मांग है। इसके अलावा मशरूम उगाकर भी लाभ लिया जा सकता है। इस दौरान रामआसरे त्रिवेदी, रवि कुमार, दिनेशचंद्र, हरिओम त्रिवेदी, विवेक कुमार, अनिल कुमार त्रिवेदी, पुत्तूलाल त्रिवेदी सहित तमाम किसान मौजूद रहे।

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