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शाहजहांपुर में मां और शिक्षक बेटे की हत्या

अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 12 May 2021 08:20 PM IST

सार

जलालाबाद के गांव सिमराखेरा चकचंद्रसेन में घर में मां-बेटे के शव मिले हैं। दोनों के सिर और पेट पर चोट के निशान मिले हैं। 
मौके पर जांच करती पुलिस
मौके पर जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार


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जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव सिमराखेरा चकचंद्रसेन में विधवा शकुंतला (70) और उसके अविवाहित शिक्षक बेटे महेंद्र विक्रम सिंह (45) की हत्या कर दी गई। दोनों के शव बुधवार को घर के आंगन में चारपाई पर पड़े मिले। दोनों के सिर और पेट पर चोट के निशान हैं । वहां पर काफी खून फैला हुआ था। अभी हत्या की कोई वजह सामने नहीं आ सकी है। पड़ोसी रिश्तेदार ने दिन में करीब 11 बजे छत से दोनों के शव देखे तो सूचना पुुलिस को दी। पुलिस ने दोनों के शव कब्जे में ले लिए हैं।

सिमराखेरा चकचंद्रसेन गांव के रहने वाले महेंद्र के पिता विजय का निधन कुछ साल पहले हो गया था। महेंद्र की एक बहन ममता का विवाह बदायूं के दातागंज तहसील के गांव सलेमपुर में हुआ था। बहन की शादी के बाद से मां शकुंतला और बेटा महेंद्र ही घर में रह रहे थे। महेंद्र गांव के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। मां-बेटे को रविवार को ग्रामीणों ने देखा था, इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि रविवार रात या सोमवार को दोनों की हत्या की गई है। शवों से काफी बदबू आ रही थी।  


एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी ने बताया कि फोरेंसिक और पुलिस टीम हत्याकांड की जांच कर रही है। शरीर पर चोट के निशान होने से मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। घर में लूटपाट की स्थिति नहीं दिख रही। जल्द हत्याकांड का खुलासा किया जाएगा।

शाहजहांपुर: मां की देखभाल की खातिर बेटे ने नहीं किया था विवाह
जलालाबाद के गांव चकचंद्रसेन में जिन मां-बेटे की हत्या हुई, वे गांव के काफी असरदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। आर्थिक रूप से भी काफी मजबूत होने के बावजूद मां-बेटे बहुत ही सरल तथा सज्जन स्वभाव के थे। उन दोनों का एक दूसरे के प्रति काफी लगाव था। पिता की मौत के बाद अपनी बूढ़ी मां की देखभाल और सेवा के चलते ही महेंद्र प्रताप ने शादी नहीं की थी। दोनों की हत्या से हर कोई हैरान है पर वारदात को क्यों अंजाम दिया गया इसका किसी के पास जवाब नहीं है।

इस खानदान से जुड़ेसौ से ज्यादा लोग अपने-अपने परिवारों के साथ इसी गांव में रहते हैं। इसी खानदान के विजय कुमार और शिवकुमार दो सगे भाई थे। छोटे भाई शिवकुमार दस-बारह साल पहले अपने परिवार के साथ मुरादाबाद जाकर बस गए जबकि बड़े भाई विजय कुमार अपनी पत्नी शकुंतला के अलावा बेटे महेंद्र प्रताप व बेटी ममता के साथ गांव में ही रहने लगे। उन्होंने बेटी की शादी थाना दातागंज के गांव सलेमपुर निवासी शरद के साथ की। करीब पांच साल पहले विजय की मौत हो गई। इसके बाद से शकुंतला और महेंद्र ही घर में रह रहे थे।

गांव वालों के मुताबिक करीब 65 बीघा पैतृक जमीन के अलावा शकुंतला के पास काफी नकदी व जेवर भी थे। गांव वालों का कहना है कि महेंद्र स्कूल के अलावा कई बच्चों को कोचिंग भी पढ़ाते थे। दोनों का कभी किसी ग्रामीण से कोई विवाद नहीं हुआ। उनका न ही ज्यादा किसी के यहां आना-जाना था। बताते हैं कि महेंद्र गांव में ही एक व्यक्ति के घर से दूध लाते थे। रविवार को दूध लेने के लिए महेंद्र गया था। कुछ लोगों ने शकुंतला को भी रविवार की शाम घर के बाहर देखा था।

गांव वालों के अनुसार कुछ दिन पहले महेंद्र की बहन की सास का निधन हो गया था। जिसका जिक्र महेंद्र ने कुछ लोगों से किया था। दो दिन तक मां-बेटे के न दिखाई देने पर ग्रामीणों को लगा कि शायद वे लोग दातागंज गए हैं।  
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शातिर लग रहे हत्यारे
घर में मुख्य गेट की दीवारें कम ऊंचाई की हैं। वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी शातिर माने जा रहे हैं क्योंकि दो हत्याओं के बावजूद आसपास के लोगों को इसकी भनक नहीं लगी। मां-बेटे की लाशें चारपाई पर पड़ीं थीं। दोनों के पेट पर घाव और सिर पर चोट के निशान थे। साथ ही वहां पर खून पड़ा होने से यह भी साफ है कि घटना को आंगन में ही अंजाम दिया गया। माना जा रहा है कि हत्यारे कई होंगे जिन्होंने दोनों को चिल्लाने का मौका भी नहीं दिया। कुछ दिनों तक इस घटना की जानकारी गांव वालों को न हो इसी कारण हत्यारे घर के मुख्य गेट को अंदर से बंद करके चुपचाप निकल गए। दोनों शव काफी फूल गए थे तथा उसमें कीड़े पड़ गए थे। काफी बदबू आ रही थी।
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बंदर भगाने गए बच्चे ने देखे शव
वारदात स्थल के पास परिवार के ही अनिल सिंह का मकान है। बताते हैं कि बुधवार सुबह छत पर बैठे बंदरों को भगाने के लिए अनिल के घर का एक बच्चा छत पर गया। इस छत से शकुंतला का पूरा मकान दिखाई पड़ता है। अनिल ने बताया कि छत से बच्चे ने देखा कि धूप होने के बाद भी अलग-अलग चारपाइयों पर मां-बेटे लेटे हुए हैं। यह बात पता लगने पर अनिल सहित अन्य घरवाले छत पर पहुंचे और जब उन लोगों ने यह दृश्य देखा तो सन्न रह गए। नीचे उतरकर वे लोग शकुंतला के घर की ओर गए लेकिन उनका दरवाजा अंदर से बंद था। सूचना पर पहुंची पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। घर के अंदर अलग-अलग चारपाई पर मां-बेटे के शव पड़े हुए थे और दोनों के सिर से पांव तक चादर ओढ़ी हुई थी। जमीन पर काफी खून फैला हुआ था। सूचना पाकर वहां पहुंचे एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी, डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल कर महेंद्र के मामा उपेंद्र सिंह और उसके बहनोई शरद से घटना के बारे में पूछताछ की लेकिन वे लोग भी कोई अहम जानकारी नहीं दे सके। पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। बावजूद इसके पुलिस लूटपाट से इनकार कर रही है, क्योंकि घर का मेन गेट अंदर से बंद था लेकिन घर के अन्य सभी दरवाजे खुले थे।

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