{"_id":"6a15dd5fb699d850450ca597","slug":"the-episode-of-the-marriage-of-shri-krishna-and-rukmini-was-enacted-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1038-174418-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का हुआ मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का हुआ मंचन
विज्ञापन
कुर्रिया कलां में माता फूलमती मंदिर पर आयोजित भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पुवायां। गांव अगौना बुजुर्ग के मनकामेश्वर नाथ शिव मंदिर परिसर में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में सोमवार रात वृंदावन के कलाकारों ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का मंचन किया।
लीला में दिखाया गया कि राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और सदाचारी थीं। बचपन से ही रुक्मिणी श्रीकृष्ण की साहस और वीरता की कायल थीं। राजनीतिक संबंधों को ध्यान में रखकर शिशुपाल से रुक्मिणी का विवाह तय हो गया, तब रुक्मिणी से रहा नहीं गया और उन्होंने श्रीकृष्ण को पत्र भेजा कि उन्होंने श्रीकृष्ण का पति के रूप में वरण किया है। वह आएं और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करें।
शिशुपाल बरात लेकर विदर्भ पहुंचा लेकिन इससे पहले ही श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम की मदद से रुक्मिणी का हरण कर लेते हैं। द्वारिका में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह हुआ। मंगलवार सुबह तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर पहुंचकर यज्ञस्थल की परिक्रमा कर प्रसाद ग्रहण किया। संवाद
विज्ञापन
-- -- -- -- -- --
राजा परीक्षित को मिले शाप का कथावाचक ने सुनाया प्रसंग
कुर्रियाकलां। गांव के माता फूलमती मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथावाचक गणेश्वर प्रसाद ने राजा परीक्षित को मिले शाप का प्रसंग सुनाने के साथ भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कलियुग के प्रभाव से राजा परीक्षित द्वारा अनजाने में वन में ध्यान साधना में लीन श्रंंगी ऋषि का अपमान कर उनके गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया। ध्यान भंग होने पर ऋषि ने उन्हें सातवें दिन तक्षक सर्प के डसने से उनकी मौत हो जाने का शाप दे दिया। बाद में राजा परीक्षित पश्चाताप करते हुए अपना राज्य छोड़कर गंगातट पर चले गए। वहां शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त किया और वह मोक्ष को प्राप्त कर भगवान के परमधाम चले गए। कथावाचक ने सूत जी और शौनक ऋषि के मध्य संवाद का प्रसंग सुनाकर भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन भी किया। संवाद
-- -- -
सादगीपूर्ण जीवन और मानव कल्याण की प्रेरणा देते हैं भगवान शिव
कांट। नए अस्पताल मार्ग के मैदान पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया। कथा व्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक्षित जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं और वह हमसभी को सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करने के साथ मानव कल्याण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि देव-दानवों के बीच हुए समुद्र मंथन से निकले विष से जीव जगत को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। इसी प्रकार वह सारी सांंसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहे और कैलाश पर्वत को अपना निवास बनाया। वह आतताइयों के लिए कठोर हैं किंतु सच्चे मन से की गई भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से दुख एवं कष्टों का निवारण करते हैं।
इस दौरान कथा व्यास से शिव जी के भजन सुनकर श्रद्धालु झूम उठे। कथा श्रवण में लालू पंडित, गोविंद शरण पांडेय, राममुरारी मिश्रा, बिरजू मिश्रा आदि शामिल रहे। संवाद
लीला में दिखाया गया कि राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और सदाचारी थीं। बचपन से ही रुक्मिणी श्रीकृष्ण की साहस और वीरता की कायल थीं। राजनीतिक संबंधों को ध्यान में रखकर शिशुपाल से रुक्मिणी का विवाह तय हो गया, तब रुक्मिणी से रहा नहीं गया और उन्होंने श्रीकृष्ण को पत्र भेजा कि उन्होंने श्रीकृष्ण का पति के रूप में वरण किया है। वह आएं और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिशुपाल बरात लेकर विदर्भ पहुंचा लेकिन इससे पहले ही श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम की मदद से रुक्मिणी का हरण कर लेते हैं। द्वारिका में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह हुआ। मंगलवार सुबह तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर पहुंचकर यज्ञस्थल की परिक्रमा कर प्रसाद ग्रहण किया। संवाद
Trending Videos
राजा परीक्षित को मिले शाप का कथावाचक ने सुनाया प्रसंग
कुर्रियाकलां। गांव के माता फूलमती मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथावाचक गणेश्वर प्रसाद ने राजा परीक्षित को मिले शाप का प्रसंग सुनाने के साथ भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कलियुग के प्रभाव से राजा परीक्षित द्वारा अनजाने में वन में ध्यान साधना में लीन श्रंंगी ऋषि का अपमान कर उनके गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया। ध्यान भंग होने पर ऋषि ने उन्हें सातवें दिन तक्षक सर्प के डसने से उनकी मौत हो जाने का शाप दे दिया। बाद में राजा परीक्षित पश्चाताप करते हुए अपना राज्य छोड़कर गंगातट पर चले गए। वहां शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त किया और वह मोक्ष को प्राप्त कर भगवान के परमधाम चले गए। कथावाचक ने सूत जी और शौनक ऋषि के मध्य संवाद का प्रसंग सुनाकर भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन भी किया। संवाद
सादगीपूर्ण जीवन और मानव कल्याण की प्रेरणा देते हैं भगवान शिव
कांट। नए अस्पताल मार्ग के मैदान पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया। कथा व्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक्षित जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं और वह हमसभी को सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करने के साथ मानव कल्याण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि देव-दानवों के बीच हुए समुद्र मंथन से निकले विष से जीव जगत को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। इसी प्रकार वह सारी सांंसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहे और कैलाश पर्वत को अपना निवास बनाया। वह आतताइयों के लिए कठोर हैं किंतु सच्चे मन से की गई भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से दुख एवं कष्टों का निवारण करते हैं।
इस दौरान कथा व्यास से शिव जी के भजन सुनकर श्रद्धालु झूम उठे। कथा श्रवण में लालू पंडित, गोविंद शरण पांडेय, राममुरारी मिश्रा, बिरजू मिश्रा आदि शामिल रहे। संवाद

कुर्रिया कलां में माता फूलमती मंदिर पर आयोजित भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद

कुर्रिया कलां में माता फूलमती मंदिर पर आयोजित भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद