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सिद्धार्थनगर: बिजली कटी तो रुक जाता है ऑपरेशन, मेडिकल कॉलेज में ओटी के लिए अलग से जेनरेटर नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 13 Aug 2022 10:51 AM IST
सार

जिला अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर के लिए अलग से जेनरेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के जेनरेटर से ओटी की लाइट जल जाती है, लेकिन एसी (एयर कंडीशनर) बंद करनी पड़ती है। संक्रमण रोकने के लिए ओटी में खिड़की नहीं होती है और छत में पंखा भी नहीं लगाया जाता है।

जिला अस्पताल में स्थित ओटी के बाहर खड़े मरीज के तीमारदार। संवाद
जिला अस्पताल में स्थित ओटी के बाहर खड़े मरीज के तीमारदार। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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विस्तार

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर(ओटी) में जेनरेटर से पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। आपूर्ति बाधित होने पर सर्जरी रोक दी जाती है। जून में भूमिगत केबल में खराबी से दो दिन आपूर्ति बाधित हुई थी तो ऑपरेशन टालना पड़ा था, जबकि मेडिकल कॉलेज खुल जाने के बाद सर्जरी की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।



जिला अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर के लिए अलग से जेनरेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के जेनरेटर से ओटी की लाइट जल जाती है, लेकिन एसी (एयर कंडीशनर) बंद करनी पड़ती है। संक्रमण रोकने के लिए ओटी में खिड़की नहीं होती है और छत में पंखा भी नहीं लगाया जाता है। इस कारण एसी का चलना आवश्यक होता है।


यही कारण है कि बिना एसी के ओटी में कुछ देर भी रहने वाले डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ पसीना से तर-बतर हो जाते हैं।
जिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली निर्बाध आपूर्ति के लिए कनेक्शन है, लेकिन फॉल्ट के कारण कभी-कभी बिजली गुल हो जाती है। आनन-फानन जिला अस्पताल का जेनरेटर चलाया जाता है।

 

इसके लिए जरूरी है बिजली
ओटी में हड्डी के अंदर रॉड डालने में उपयोगी सी आर्म मशीन, मॉनीटर, उपकरणों को संक्रमण रोधी बनाने के लिए ऑटो क्लेव, सर्जरी के स्थान से खून बहना रोकने के लिए कॉटरी, खून या पानी खींचने के लिए सक्शन मशीन को चलाने में बिजली की आवश्यकता होती है।

ऐसी है स्थिति
जिला अस्पताल में 125 केवीए का जेनरेटर है। इससे इमरजेंसी, वार्ड एवं पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट), एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बार्न केयर यूनिट), एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड एवं पैथोलॉजी में बिजली आपूर्ति दी जाती है। जेनरेटर से ऑपरेशन थियेटर भी जुड़ा है, लेकिन एसी का कनेक्शन नहीं जोड़ा गया है। वहीं करीब तीन दशक पुराने 75 केवीए के दो और 62 केवीए का एक जेनरेटर हैं, जो कुछ देर चलाने के बाद ही गर्म हो जाते हैं। तीनों लोड नहीं उठा पाते हैं, जबकि कई बार मरम्मत कराई जा चुकी है।

जिला अस्पताल के जेनरेटर से ओटी में बिजली आपूर्ति दी जाती है, लेकिन एसी नहीं चलती है। मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन अस्पताल में नए जेनरेटर लगाए जाएंगे। प्रयास करेंगे कि ओटी के लिए अलग जेनरेटर की व्यवस्था हो जाए। -डॉ. एके झा, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल
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