पीएम के आगमन से बढ़ेगी कालानमक चावल की ‘खुशबू’

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 09:33 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
पीएम के आगमन से बढ़ेगी कालानमक चावल की ‘खुशबू’
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। कृषि वैज्ञानिकों की चिंता का विषय है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में काला नमक चावल की खुशबू धीरे-धीरे कम हो सकती है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से कालानमक चावल की खुशबू और बढ़ सकती है। कालानमक चावल की शोध परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है, जबकि इसी सत्र में कालानमक चावल की सीएफसी शुरू होगी तो किसानों की तरक्की का रास्ता साफ होगा।
वर्ष 2019 में काला नमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जा रही है। कीमतों में भी वृद्धि हो रही है। डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति ने जिले में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रस्ताव बनाकर ओडीओपी सेल लखनऊ में फरवरी 2021 को भेजा है। यह 15 करोड़ रुपये की परियोजना है। इसके अंतर्गत कालानमक चावल की गुणवत्ता बनाए रखने और बढ़ाने पर शोध होना है।

कालानमक धान पर शोध करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कालानमक चावल की गुणवत्ता पर निरंतर शोध करने की आवश्यकता है। नेपाल के तराई इलाके में पैदा हुए कालानमक चावल में स्वाद और सुगंध कुछ अलग होती है। बर्डपुर, शोहरतगढ़, बढ़नी, नौगढ़ क्षेत्र में ज्यादा किसान कालानमक धान की खेती करते हैं, जबकि जिले के सभी क्षेत्रों में कालानमक के लिए मिट्टी अच्छी है। बासमती एक्सपोर्ट बोर्ड की तरह कालानमक एक्सपोर्ट बोर्ड सिद्धार्थनगर बनाया जाना चाहिए।
एयर कंडीशन हाल में चावल रखने की सुविधा
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दयाशंकर सरोज ने बताया कि 6.90 करोड़ रुपये की परियोजना कालानमक चावल के कॉमन फैसिलिटी सेंटर को बनाकर हैंडओवर करने की अंतिम तिथि अक्तूबर 2021 है। नवंबर तक कार्य पूूर्ण होने की संभावना है। इस संगठन से 1200 किसान जुड़े हुए हैं। इस सीएफसी में एयर कंडीशन हाल में चावल रखने की सुविधा होगी। अनुकूल वातावरण में कालानमक धान या चावल नहीं रखा जाता है तो सुगंध उड़ जाती है। कार्यदायी संगठन शिवांश सिद्धार्थ एयर कंडीशन डेवलपमेंट प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्टर अभिषेक सिंह ने बताया कि एक माह में सीएफसी का कार्य पूर्ण हो जाएगा। इसमें धान को प्रोसेस करके स्टोर कर दिया जाएगा, जब किसानों केे जरूरत होगी तो वे महंगे दाम पर बेच सकेंगे।
अब होगा किसानों का फायदा
कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि एयर कंडीशन हाल में भंडारण की सुविधा मिलने पर काला नमक चावल के किसानों का फायदा होगा। इस बार करीब 15 हजार हेक्टेयर में कालानमक धान की रोपाई हुई है। कालानमक चावल के निर्यात और ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू होने के बाद किसानों की रुझान बढ़ गई है। जिले में वर्ष 2020 में कालानमक का रकबा आठ हजार हेक्टेयर था। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत कालानमक की दस प्रजातियों के धान की रोपाई की गई है। इसमें तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है कि इस जलवायु में अन्य मिट्टी के कालानमक धान से कितनी खुशबू आ रही है।
ऑनलाइन होगी मार्केटिंग
जिला प्रशासन एवं जिला उद्योग विभाग ने काला नमक चावल की ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए एक कंपनी से अनुबंध किया है। चावल की खेप कंपनी को भेज दी गई है और सैंपल भी पास हो गया है। कंपनी की पैकिंग के बाद देश-विदेश और दूसरे राज्यों में भी जिले का कालानमक चावल का स्वाद ले सकेंगे।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00