अवध में आंदोलन को नई ऊर्जा दे गए टिकैत

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 12:11 AM IST
आरएमपी कॉलेज मैदान पर महाविद्यालय की दीवार पर बैठे  किसान व समर्थक। - संवाद
आरएमपी कॉलेज मैदान पर महाविद्यालय की दीवार पर बैठे किसान व समर्थक। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। किसान आंदोलन के अगुवाकार भाकियू मुखिया राकेश टिकैत मुजफ्फरनगर से महापंचायत की शुरुआत करने के बाद सोमवार को सीतापुर की सरजमीं पर पहुंचे। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की ताकत बनकर उभरे राकेश टिकैत की इस महापंचायत से अवध में उनकी ताकत कितनी बलवती होगी और आंदोलन कितना तेज होगा, यह तो अभी कहना मुमकिन नहीं है। हां, इतना जरूर है कि इस महापंचायत से कहीं न कहीं चल रहे आंदोलन को नई ऊर्जा मिलेगी।
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यूपी विधानसभा चुनाव का वक्त करीब है, ऐसे में इस आंदोलन से सियासी विरोध का माहौल भी अनुकूल बनेगा। अब देखना यह होगा कि सत्ता के लिए लंबे अर्से से छटपटा रहे विपक्षी दल महापंचायत के बाद किसानों के तेवर अपने हक में किसी तरह से भुना भी पाएंगे या नहीं। कृषि कानून लागू होने के बाद विरोध में उतरे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी नरेश टिकैत ने लंबे समय तक दिल्ली बार्डर पर धरना देकर आंदोलन को मजबूत करने की हर मुमकिन कोशिश की।

शुरुआती दौर में तेजी पकड़ने वाला आंदोलन धीरे-धीरे शांत होता चला गया, लेकिन पांच सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में पहली बार किसान महापंचायत के बाद प्रदेश मेें माहौल बनाने की कोशिश की। इस कड़ी में इसकी शुुरुआत राकेश टिकैत ने अवध क्षेत्र के सीतापुर जिले से सोमवार को की। इस महापंचायत में राकेश टिकैत ने कृषि कानूनों के बहाने केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर सियासी तीर चलाए। करीब 45 मिनट के भाषण में भाजपा सरकार उनके निशाने पर रही।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आरएमपी ग्राउंड में हुई महापंचायत कई मायनों में अहम मानी जा रही है। जानकारों की माने तो सीतापुर में महापंचायत के सहारे राकेश टिकैत अब अवध में अपनी जमीन तैयार कर ले गए हैं। आंदोलन को कहीं न कहीं नई ऊर्जा दे गए हैं। अब देखना यह होगा कि नई ऊर्जा क्या नया बदलाव लाती है। गुणा-भाग का दौर भी शुरू हो चुका है।
पश्चिम से अवध मथने के निकाले जा रहे सियासी मायने
शुरुआती दौर में आंदोलन को धार देने के बाद साइलेंट मोड में चले गए राकेश टिकैत का यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले अचानक से पश्चिम से अवध को मथने और मंथन के शुरू हुए दौर से कई सियासी मायने भी निकाले जाने लगे हैं। लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं। हर कोई यह कह रहा है कि अचानक सरगर्मी बढ़ी है, इसके पीछे कोई और ही पटकथा लिखी जा रही है, लेकिन राजनीतिक चाणक्य अभी ऐसे माहौल पर खुलकर राय नहीं दे रहे हैं।
कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना
राकेश टिकैत के 33 महीने तक और आंदोलन चलाने की बात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। यूपी में चुनाव की सरगर्मी बढ़ते ही राकेश टिकैत की बढ़ी गतिविधियों को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे। सोमवार को 33 महीने तक और आंदोलन चलने की बात कहने से यह साफ झलक रहा है कि उनकी निगाहें कहीं और व निशाना कहीं और है।
दरअसल, मोदी ने दूसरी बार 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री की शपथ ली थी। इस हिसाब से मोदी सरकार के दूूसरे कार्यकाल को अभी दो साल तीन महीने हुए हैं। 33 महीने अभी केंद्र सरकार के कार्यकाल को बाकी है। ऐसे में 33 महीने सरकार के कार्यकाल और दूसरी तरफ राकेश टिकैट का 33 महीने तक आंदोलन की बात कहना कहीं न कहीं उनकी निगाहें केंद्र के चुनाव पर होना भी दर्शा रहा है।

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