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Sonebhadra News: नाबालिग को जंगल में ले जाकर किया था दुष्कर्म, दोषी को 20 साल की सजा
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सोनभद्र। नाबालिग को बहाने से जंगल में ले जाकर दुष्कर्म करने के दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद और 31 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओमकार शुक्ला की अदालत ने मंगलवार को प्रकरण की सुनवाई की। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य और अधिवक्ताओं की दलीलों के आधार पर यह फैसला सुनाया। अर्थदंड अदा न करने पर 13 महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की पूरी धनराशि जमा होने के बाद पीड़िता को प्रदान कर दी जाएगी।
प्रकरण ओबरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता की मां ने 10 मार्च 2024 को तहरीर में बताया था कि उसके बेटी तीन महीने पूर्व घर पर अकेली थी। उस समय ओबरा के सेक्टर 10 निवासी बबलू उसके घर आया और गायब हुई बकरी को खोजने के बहाने उसे जंगल में ले गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जाने से मारने की धमकी दी। कुछ दिन बाद बेटी के पेट में बार-बार दर्द की शिकायत पर जब उसने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी। अल्ट्रासाउंड में उसके पेट में लगभग तीन महीने का गर्भ पाया गया। तब बेटी ने पूरी घटना को रो-रोकर बताया। प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की और चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के समय अभियोजन ने कुल आठ गवाह परीक्षित कराए। शैक्षिक प्रमाण पत्र के साथ मेडिकल बोर्ड से कराए गए परीक्षण में भी पीड़िता नाबालिग साबित हुई। न्यायालय का कहना था कि दोषी के इस कृत्य से न केवल पीड़िता की निजता भंग हुई है बल्कि उसके परिवार के अन्य सदस्यों की मर्यादा भी धूमिल हुई है। इस अपराध का समाज में पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए दोषी को दंड दिया जाना जरूरी है। दुष्कर्म-पॉक्सो एक्ट और जान से मारने की धमकी के अपराध के लिए पाते हुए उपरोक्त सजा सुनाई गई।
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प्रकरण ओबरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता की मां ने 10 मार्च 2024 को तहरीर में बताया था कि उसके बेटी तीन महीने पूर्व घर पर अकेली थी। उस समय ओबरा के सेक्टर 10 निवासी बबलू उसके घर आया और गायब हुई बकरी को खोजने के बहाने उसे जंगल में ले गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जाने से मारने की धमकी दी। कुछ दिन बाद बेटी के पेट में बार-बार दर्द की शिकायत पर जब उसने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी। अल्ट्रासाउंड में उसके पेट में लगभग तीन महीने का गर्भ पाया गया। तब बेटी ने पूरी घटना को रो-रोकर बताया। प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की और चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के समय अभियोजन ने कुल आठ गवाह परीक्षित कराए। शैक्षिक प्रमाण पत्र के साथ मेडिकल बोर्ड से कराए गए परीक्षण में भी पीड़िता नाबालिग साबित हुई। न्यायालय का कहना था कि दोषी के इस कृत्य से न केवल पीड़िता की निजता भंग हुई है बल्कि उसके परिवार के अन्य सदस्यों की मर्यादा भी धूमिल हुई है। इस अपराध का समाज में पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए दोषी को दंड दिया जाना जरूरी है। दुष्कर्म-पॉक्सो एक्ट और जान से मारने की धमकी के अपराध के लिए पाते हुए उपरोक्त सजा सुनाई गई।
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